न कांग्रेस, न सपा… पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई अपनी पार्टी, मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने नई पारी का ऐलान कर दिया है। किसी स्थापित राजनीतिक दल का दामन थामने के बजाय उन्होंने अपनी पार्टी ‘जननीति भारत’ बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया है। उनकी इस घोषणा से उत्तर प्रदेश की सियासत में नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
2013 बैच की IAS अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की अटकलें उनकी नौकरी छोड़ने के बाद से ही लगाई जा रही थीं। उन्होंने 30 सितंबर को राजनीति में आने के संकेत दिए थे और कहा था कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी।
इसके बाद चर्चा थी कि वह कांग्रेस या समाजवादी पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर सकती हैं। हालांकि, दिव्या मित्तल ने किसी दल में शामिल होने के बजाय अपनी अलग पार्टी बनाने का फैसला किया।
उन्होंने फेसबुक पर जानकारी दी थी कि 15 अक्टूबर को वह अपने राजनीतिक सफर के अगले कदम का खुलासा करेंगी। गुरुवार को वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने अपनी पार्टी और चुनावी योजना की जानकारी दी।
राजनीति में बदलाव के लिए जनता को केंद्र में रखने का दावा
दिव्या मित्तल ने पार्टी की घोषणा करते हुए कहा कि समस्या राजनीति की कमी नहीं, बल्कि लोगों की सुनवाई नहीं होने की है। उन्होंने जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर फैसले और जवाबदेही को अपनी राजनीतिक सोच का आधार बताया।
उनका कहना है कि शासन और नीतियों के निर्माण में आम लोगों की भूमिका होनी चाहिए, ताकि फैसले जनता की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लिए जा सकें।
‘जननीति भारत’ के तीन वचन क्या हैं?
दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी की राजनीतिक सोच को तीन प्रमुख वचनों के जरिए सामने रखा।
- जनता की भागीदारी: देश की नीतियों के केंद्र में जनता होगी और नीतियां लोगों की भागीदारी से तय की जाएंगी।
- जरूरत के आधार पर फैसले: निर्णय किसी की पहचान के बजाय उसकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
- जवाबदेही और सुधार: हर काम के लिए जनता के प्रति जवाबदेही तय होगी और उसके आधार पर व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान
पार्टी बनाने के साथ ही दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है। ऐसे में उनकी राजनीतिक शुरुआत अब सीधे चुनावी मैदान से जुड़ गई है।
हालांकि, नई पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर कितना समर्थन मिलता है और आगामी विधानसभा चुनाव में वह कितना प्रभाव छोड़ पाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, पूर्व IAS अधिकारी का अपनी पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
