रावतपुरा सरकार फोन टैपिंग केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: CBI की टैपिंग अवैध, ऑडियो रिकॉर्डिंग नष्ट करने के आदेश
फोन टैपिंग से जुटाए गए सबूत नहीं होंगे मान्य, FIR और चार्जशीट रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार
बिलासपुर, 06 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रावतपुरा सरकार (रवि शंकर महाराज) से जुड़े चर्चित फोन टैपिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए CBI द्वारा की गई फोन टैपिंग को अवैध करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फोन टैपिंग से प्राप्त सभी ऑडियो रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े डेटा को नष्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि अदालत ने CBI की एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की सुनवाई फोन टैपिंग से जुटाए गए साक्ष्यों के बिना होगी। CBI केवल अन्य वैध दस्तावेजों, गवाहों और कानूनन स्वीकार्य साक्ष्यों के आधार पर ही अपना पक्ष अदालत के सामने रख सकेगी।
फोन टैपिंग की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फोन टैपिंग की अनुमति देने की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि फोन टैपिंग का मूल आदेश 28 जून 2025 को जारी किया गया था, जबकि इसे 1 जून 2025 से प्रभावी दर्शाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर खामी माना।
अदालत ने यह भी कहा कि आदेश में कहीं भी ‘सार्वजनिक आपातस्थिति’ या ‘जनसुरक्षा’ जैसी अनिवार्य कानूनी शर्तों का उल्लेख नहीं था, जबकि भारतीय कानून के तहत फोन टैपिंग की अनुमति के लिए इनका होना आवश्यक है।
निजता के अधिकार का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फोन टैपिंग किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार (Right to Privacy) में सीधा हस्तक्षेप है। इसलिए ऐसी कार्रवाई केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए ही की जा सकती है।
इसी आधार पर अदालत ने 28 जून 2025 के CBI टैपिंग आदेश, 4 जुलाई 2025 को गृह मंत्रालय की मंजूरी और 15 सितंबर 2025 की रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को भी निरस्त कर दिया।
क्या है मामला?
CBI ने 30 जून 2025 को देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रिश्वत, फर्जी मरीजों और ‘घोस्ट फैकल्टी’ के जरिए मेडिकल कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट प्रभावित की गई।
रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के चेयरमैन होने के कारण रावतपुरा सरकार (रवि शंकर महाराज) को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने CBI की फोन टैपिंग के आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

