CG High Court: CIMS पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस बोले- शपथ पत्र देखकर लगता है AI से तैयार किया गया; अदालत को गुमराह न करें
बिलासपुर, 8 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया हो।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि यदि अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में इतनी बेहतर होती, तो मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं। उन्होंने कहा कि केवल कागजी दावे करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
‘कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश न करें’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि शपथ पत्र में एक ही बातें बार-बार दोहराई गई हैं। दस्तावेज भले ही देखने में प्रभावी लगे, लेकिन उससे अस्पताल की वास्तविक स्थिति नहीं सुधरती।
अदालत ने सरकार और अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि कोर्ट के समक्ष तथ्यों को ईमानदारी से रखा जाए और किसी भी तरह से अदालत को गुमराह करने का प्रयास न किया जाए।
निरीक्षण रिपोर्ट में मिली थीं गंभीर खामियां
हाईकोर्ट ने मार्च और अप्रैल में कोर्ट कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में अस्पताल की कई गंभीर कमियां सामने आई थीं।
निरीक्षण में पाया गया था कि अस्पताल की छत से पानी टपक रहा था, कई वार्डों और गलियारों में जलभराव की स्थिति थी तथा फायर फाइटिंग सिस्टम लंबे समय से बंद पड़ा था, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए थे।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है और इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
CIMS के लिए खरीदी जा रही हैं 31 नई मशीनें
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के लिए 31 नई मेडिकल मशीनों की खरीद की जा रही है। इनमें से 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं, कुछ के लिए खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि सभी मशीनें जल्द अस्पताल में स्थापित कर दी जाएंगी।
‘मरीज को बेहतर इलाज मिलेगा तभी सफल मानी जाएगी व्यवस्था’
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस जनहित याचिका का उद्देश्य किसी अधिकारी को दंडित करना नहीं, बल्कि CIMS की स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करना है।
अदालत ने कहा कि जब जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, तभी सरकारी दावों पर लोगों का भरोसा कायम होगा।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कोर्ट कमिश्नर को दोबारा अस्पताल का निरीक्षण करने और सरकार द्वारा किए गए सुधारों की जमीनी हकीकत की जांच करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

