CG-टिकट का खेल! छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश जा रही थी तत्काल टिकट…खाली रेलवे टिकट पर हाथ से PNR लिखकर बेचते थे ‘कन्फर्म सीट’, RPF ने खोला बड़ा राज

बैकुंठपुर। रेलवे की कन्फर्म टिकट के नाम पर चल रहे अवैध धंधे का RPF ने पर्दाफाश किया है। सीटी पीआरएस बैकुंठपुर में तैनात नगर पालिका के एक संविदा कर्मचारी और उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति की मिलीभगत से रेलवे टिकटों की खरीद-बिक्री का खेल चल रहा था। जांच आगे बढ़ी तो आरोपियों के मोबाइल ने पूरा राज उगल दिया। 60 तत्काल और सामान्य टिकटों के स्क्रीनशॉट मिले, जिनकी कुल कीमत 3.68 लाख रुपये से ज्यादा है।
मामले की शुरुआत एक ऐसे टिकट से हुई, जिसने रेलवे जांच एजेंसियों को चौंका दिया। 1 अगस्त को बैकुंठपुर PRS काउंटर से जारी खाली टिकट पर पेन से PNR और दूसरी जानकारी हाथ से लिख दी गई थी। यह टिकट इलाहाबाद जंक्शन में जांच के दौरान पकड़ा गया। सिस्टम में PNR नंबर डाला गया तो वह फर्जी निकला।
इसके बाद RPF ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त बिलासपुर के निर्देश पर अंबिकापुर RPF निरीक्षक सुनीता मिंज ने जांच संभाली और जल्द ही टिकट के पीछे चल रहे पूरे नेटवर्क का सुराग मिल गया।
खाली टिकट से तैयार होता था ‘कन्फर्म’ टिकट!
जांच में बैकुंठपुर PRS में नगर पालिका के संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार (35) का नाम सामने आया। आरोप है कि वह खाली टिकट पर पेन से PNR और यात्रियों की दूसरी जानकारी लिखकर टिकट तैयार करता था।
इसके बाद यह टिकट उत्तर प्रदेश के भदोही निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा (48) तक पहुंचता था। आरोप है कि संजय इन टिकटों को ग्राहकों को अतिरिक्त रकम लेकर बेचता था।
400 रुपये कमीशन… फिर 800 तक की कमाई!
पूछताछ में टिकट के इस खेल का पूरा हिसाब भी सामने आया। आरोप है कि अविनाश टिकट बनाकर बस से संजय को बनारस भेजता था और बदले में उसे प्रति यात्री 400 रुपये कमीशन मिलता था।
वहीं संजय ग्राहकों को टिकट बेचकर प्रति यात्री 600 से 800 रुपये तक का मुनाफा कमाता था। यानी रेलवे टिकट जरूरतमंद यात्री के लिए सफर का साधन था, लेकिन आरोपियों के लिए कमाई का जरिया!
मोबाइल खोला तो सामने आया पूरा ‘टिकट कांड’
RPF ने जब संजय के मोबाइल की WhatsApp चैट खंगाली तो मामला और बड़ा निकला। चैट में 60 तत्काल और सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों की जानकारी मिली। इनमें 14 टिकट ऐसे थे, जिन पर हाथ से PNR और अन्य विवरण लिखे गए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि इन टिकटों की जानकारी अविनाश के मोबाइल से भेजी गई थी। पूछताछ में अविनाश ने कथित तौर पर PRS काउंटर से तत्काल टिकट बनाने और 14 टिकट हाथ से लिखकर संजय को देने की बात स्वीकार की।
न लाइसेंस, न अधिकार… फिर भी टिकटों का धंधा!
RPF ने दोनों से रेलवे आरक्षित टिकटों की खरीद-बिक्री के लिए वैध अधिकार पत्र मांगा, लेकिन दोनों कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। इसके बाद रेलवे टिकटों को अतिरिक्त राशि लेकर बेचने की बात सामने आने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मोबाइल से बरामद 60 टिकटों की कुल कीमत 3,68,351 रुपये बताई गई है। RPF ने दोनों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत कार्रवाई करते हुए 16 अगस्त 2026 को अपराध क्रमांक 727/26 दर्ज किया है।
अब RPF इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि टिकटों के इस खेल में इन दोनों के अलावा और कितने लोग जुड़े हैं और यह नेटवर्क कितने समय से चल रहा था।
