CG चर्चित संजू त्रिपाठी मर्डर केस में बड़ा उलटफेर; कपिल त्रिपाठी समेत सभी 22 आरोपी बरी; पुलिस की विवेचना पर कोर्ट ने उठाए सवाल

बिलासपुर, 30 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के चर्चित संजू त्रिपाठी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पुलिस की जांच और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब चार साल पहले दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या के मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी बनाए गए कपिल त्रिपाठी समेत सभी 22 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
जिस हत्याकांड को पुलिस ने पारिवारिक और संपत्ति विवाद से जोड़ते हुए साजिश के तहत अंजाम दी गई वारदात बताया था, उसी मामले में अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ दोष साबित नहीं कर सका। फैसले के बाद कपिल त्रिपाठी सहित सभी आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
सकरी बाइपास पर दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर दिया था संजू को
14 दिसंबर 2022 की शाम बिलासपुर के सकरी बाइपास स्थित खनिज बैरियर के पास प्राणनाथ उर्फ संजू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने सरेराह उन पर गोलियां बरसाई थीं। वारदात इतनी सनसनीखेज थी कि पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा हुई थी।
संजू त्रिपाठी की पहचान कांग्रेस नेता और हिस्ट्रीशीटर के रूप में थी। घटना के बाद सकरी पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में पुलिस को पारिवारिक विवाद और संपत्ति को लेकर चल रहे तनाव की जानकारी मिली।
बड़े भाई की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा था कपिल पर
पुलिस की जांच में मृतक के छोटे भाई कपिल त्रिपाठी का नाम प्रमुखता से सामने आया था। पुलिस का दावा था कि दोनों भाइयों के बीच संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि हत्या को अंजाम देने के लिए शूटरों और अन्य सहयोगियों की मदद ली गई। जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग लोगों की भूमिका सामने आई और कुल 22 आरोपियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया।
चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद सभी को राहत
मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय में अभियोजन चलाया। लेकिन सुनवाई के दौरान पुलिस की विवेचना और अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर सवाल उठे। जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनवाई पूरी करने के बाद कपिल त्रिपाठी सहित सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले ने प्रदेश के चर्चित हत्याकांड की जांच को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अब पुलिस की जांच और अभियोजन पर उठेंगे सवाल
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस मामले में पुलिस ने पारिवारिक विवाद, साजिश और शूटरों की भूमिका का दावा किया था, वह दावा अदालत में दोषसिद्धि तक क्यों नहीं पहुंच सका? अदालत ने किन साक्ष्यों को अपर्याप्त माना, विवेचना में कौन-सी कमियां पाईं और अभियोजन के कौन-से तर्क स्वीकार नहीं किए गए, इसकी तस्वीर फैसले के विस्तृत आदेश से साफ होगी।
फिलहाल संजू त्रिपाठी हत्याकांड में सभी 22 आरोपियों की रिहाई ने पुलिस की जांच से लेकर अभियोजन की तैयारी तक को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
