BJP का मिशन 2028: छत्तीसगढ़ में हारी सीटों को जीतने के लिए भाजपा का मास्टर प्लान, ढाई साल पहले शुरू की तैयारी…निगम-मंडल अध्यक्षों को मिली जिम्मेदारी

रायपुर, 11 जून 2026। छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा अब ‘मिशन 2028’ मोड में आ चुकी है। भाजपा ने उन 36 सीटों पर, जहाँ उसे हार का सामना करना पड़ा था, जीत हासिल करने के लिए अभी से रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। यह छत्तीसगढ़ की राजनीति के इतिहास में पहली बार है जब चुनावों से ढाई साल पहले विधानसभाओं की कमान प्रभारी नेताओं को सौंप दी गई हो।
निगम-मंडल अध्यक्षों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इस नई रणनीति के तहत, भाजपा ने हर विधानसभा सीट के लिए एक प्रभारी नियुक्त किया है। इनमें से अधिकांश प्रभारियों को निगम, मंडल या आयोगों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों पर नियुक्त किया गया है।

इन प्रभारियों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:
* इन्हें हर महीने कम से कम सात दिन अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्र में बिताने होंगे।
* अगले ढाई साल में इन्हें हर घर तक पहुँचकर जीत की पूरी प्लानिंग तैयार करनी है।
* पार्टी की ओर से स्पष्ट संदेश है कि जिला अध्यक्ष से लेकर बूथ प्रभारी तक सभी को इन प्रभारियों की बात सुननी और माननी होगी।
गृह जिले से विपरीत दिशा में मिली नियुक्तियाँ
इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रभारियों को उनके गृह जिले से विपरीत दिशा की विधानसभा सीटों का जिम्मा दिया गया है। इसके पीछे का उद्देश्य टिकट की दावेदारी को रोकना है। उदाहरण के लिए, यदि कोई नेता किसी विशेष क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है, तो उसे उस क्षेत्र से दूर प्रभारी बनाया गया है ताकि वह पूरी निष्पक्षता से काम कर सके।
बूथ स्तर पर सूक्ष्म योजना: ‘रेड’, ‘येलो’ और ‘ग्रीन’ ज़ोन
हार को जीत में बदलने के लिए भाजपा ने विधानसभाओं को बूथ स्तर पर वर्गीकृत किया है। सभी बूथों को तीन भागों में बाँटकर काम हो रहा है:
* रेड ज़ोन बूथ: ऐसे बूथ जहाँ भाजपा कभी नहीं जीती है और पिछली बार भी बड़ी संख्या से हारी थी।
* येलो ज़ोन बूथ: ऐसे बूथ जहाँ भाजपा कभी जीतती है तो कभी हारती है, और पिछली बार कम अंतर से हारी थी।
* ग्रीन ज़ोन बूथ: ऐसे बूथ जहाँ भाजपा आम तौर पर जीतती रहती है
प्रभारियों को विशेष रूप से ‘रेड’ और ‘येलो’ ज़ोन वाले बूथों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
प्रभारियों के लिए मुख्य कार्य (Target tasks):
1. बूथ टीम तैयार करना:हर बूथ पर 25 लोगों की टीम तैयार करना।
2. समितियों का गठन: बूथ अध्यक्ष, सचिव, बीएलए-2, महिला-युवा प्रमुख, मन की बात प्रमुख और एक वर्ष में होने वाले कार्यक्रम प्रमुख नियुक्त करना।
3. शक्ति केंद्र बनाना: तीन-चार वार्ड पर एक शक्ति केंद्र बनाना, जहाँ संयोजक, सह-संयोजक और प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे।
4. समीकरण तैयार करना: हर बूथ और शक्ति केंद्र पर विधानसभा का जातिगत समीकरण तैयार करना।
5. सामाजिक संगठनों के साथ बैठकें: क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित करना।
इन प्रभारियों को हर तीन महीने में अपनी प्रगति रिपोर्ट क्षेत्रीय सह-संगठन महामंत्री को सौंपनी होगी।

हारी सीटों के लिए नियुक्त विधानसभा प्रभारियों की सूची
प्रभारियों के नाम और उनकी आवंटित विधानसभा क्षेत्र की जानकारी दी गई है:
| नाम (प्रभारी) | आवंटित विधानसभा |
| संजय श्रीवास्तव – डोंगरगांव |
| दीपक महस्के – संजारी बालोद |
| सौरभ सिंह – रामपुर |
| राजीव अग्रवाल – पाटन |
| केदार नाथ गुप्ता – भानुप्रतापपुर |
| नीलू शर्मा – कसडोल |
| अनुराग सिंह देव – मस्तुरी |
| भूपेन्द्र सवन्नी – जांजगीर—चांपा |
| विकास मरकाम – धमतरी |
| श्रीनिवास राव मद्दी – बस्तर |
| शशांक शर्मा – अकलतरा |
| रामसेवक पैकरा – कोटा |
| चन्दूलाल साहू – डोंडी लोहारा |
| दिनेश कश्यप – बीजापुर |
| राकेश पाण्डेय – गुंडरदेही |
| संदीप शर्मा – खैरागढ़ |
| राजा पांडेय – पामगढ़ |
| लोकेश कावड़िया – चंद्रपुर |
| शालिनी राजपूत – सिहावा |
| प्रदीप नामदेव – जैजैपुर |
| रूपसिंह मंडावी – कोंटा |
| कमल गर्ग – सारंगढ़ |
| चंद्रहास चंद्राकर – बिलाईगढ़ |
| प्रफुल्ल विश्वकर्मा – खल्लारी |
| अमरजीत छाबड़ा – सरायपाली |
| प्रहलाद रजक – भाटापारा |
| बिशेषर पटेल – मोहला—मानपुर |
| सुरेन्द्र कुमार बेसरा – धरमजयगढ़ |
| विश्वविजय सिंह तोमर – पाली तानाखार |
| जितेन्द्र कुमार साहू – डोंगरगढ़ |
| सुरेश कुमार चंद्रवंशी – खुज्जी |
| इन्द्रजीत सिंह गोल्डी – भिलाई नगर |
| शम्भू नाथ चक्रवर्ती -लैलूंगा |
| राजेन्द्र सिंह राजपूत -सकती |
| रजनीश सिंह – खरसिया |
| नेहरू निषाद – बिन्द्रानवागढ़ |










