Bilaspur News: CIMS ने अपनाया ‘ग्रीन एनेस्थीसिया’, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल

बिलासपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के पर्यावरण पर बढ़ते असर को देखते हुए Chhattisgarh Institute of Medical Sciences (CIMS), बिलासपुर ने ‘ग्रीन एनेस्थीसिया’ तकनीक को अपनाया है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित उपचार देना है, साथ ही ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को कम करना भी है।
जानकारी के अनुसार, एनेस्थीसिया में उपयोग होने वाली गैसें जैसे डेसफ्लुरेन और नाइट्रस ऑक्साइड, वातावरण में लंबे समय तक बनी रहती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड से भी अधिक नुकसानदायक साबित होती हैं। बड़ी संख्या में सर्जरी के कारण इन गैसों का उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मरीजों को एनेस्थीसिया का असर कम समय के लिए होता है, लेकिन डॉक्टरों और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ को लंबे समय तक इन गैसों के संपर्क में रहना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ता है।
‘ग्रीन एनेस्थीसिया’ के तहत गैसों के उपयोग को नियंत्रित किया जाएगा, गैस आधारित तरीकों पर निर्भरता घटाई जाएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण कम होगा, बल्कि अस्पताल में कार्यरत स्टाफ की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. मधुमिता मूर्ति ने बताया कि यह पहल मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ हानिकारक उत्सर्जन में कमी लाने में मदद करेगी। वहीं, डीन डॉ. रमनेश मूर्ति ने कहा कि अत्यधिक गैस उपयोग को कम कर पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को घटाया जा सकता है, और CIMS इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।









