राहुल के दौरे से पहले छत्तीसगढ़ में सियासी पारा चढ़ा! रमन सिंह बोले— ‘कांग्रेस का बंटाधार करने आ रहे राहुल’, भूपेश बघेल का करारा जवाब— मशीनरी के दम पर लोकतंत्र पर डकैती डाल रही भाजपा

– राहुल जहां जाते हैं, वहां बंटाधार होना तय’— डॉ. रमन सिंह का तीखा हमला
दुर्ग-भिलाई, 16 जून 2026: छत्तीसगढ़ का सियासी पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों में आर-पार की जंग छिड़ गई है।
दुर्ग सर्किट हाउस में मीडिया के सामने हुंकार भरते हुए विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राहुल गांधी पर सीधा और तीखा हमला बोला। मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल का जश्न मनाते हुए रमन सिंह ने तंज कसा:
“राहुल गांधी जहां भी कदम रखते हैं, वहां कांग्रेस का पूरी तरह बंटाधार हो जाता है। मैं तो कहता हूं कि राहुल को छत्तीसगढ़ का एक-दो बार और चक्कर लगा लेना चाहिए, ताकि यहां बची-खुची कांग्रेस का भी पूरी तरह सफाया हो सके।”

भूपेश बघेल का पलटवार: ‘ये चुनाव नहीं, लोकतंत्र की डकैती है!’
रमन सिंह के इस सीधे हमले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया और न सिर्फ भाजपा बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया। बघेल ने भाजपा की हालिया जीतों को सामान्य मानने से साफ इनकार करते हुए इसे ‘लोकतंत्र की डकैती’ करार दिया।
बघेल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा के ‘90% स्ट्राइक रेट’ पर गंभीर आरोप लगाए:
असंभव स्ट्राइक रेट: 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जिन भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, वहां भाजपा का जीत का प्रतिशत अचानक 90% तक कैसे पहुंच गया?
रमन सिंह को भी घेरा: भूपेश बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा कि

जब डॉ. रमन सिंह खुद मुख्यमंत्री थे और अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे, तब भी भाजपा को ऐसा अकल्पनीय स्ट्राइक रेट कभी नसीब नहीं हुआ।
चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा हमला करते हुए बघेल ने हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सामान्य राजनीतिक जीत नहीं है।
“अब मतदाता नहीं, सरकारें तय कर रही हैं अपना भविष्य”
बघेल यहीं नहीं रुके, उन्होंने निर्वाचन आयोग और सरकारी तंत्र पर सीधा निशाना साधते हुए कहा: “यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि सरेआम लोकतंत्र की डकैती है। एक दौर था जब देश के मतदाता अपनी सरकार चुनते थे, लेकिन आज के दौर में सरकारें ही निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करके यह तय कर रही हैं कि कौन वोट देगा और किसका पत्ता काटना है। मतदाताओं की भूमिका को पूरी तरह से कुचला जा रहा है।”










