CG-सब-इंजीनयर सस्पेंड; CEO ने की बड़ी कार्रवाई, इस मामले में लापरवाही बरतने पर गिरी निलंबन की गाज…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी सड़क निर्माण योजनाओं की फाइलों से लेकर जमीन पर चल रहे कामों तक अब जवाबदेही तय करने की तैयारी है। सड़क निर्माण में देरी, DPR तैयार करने में लापरवाही और योजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (CGRDA) के CEO भीम सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। समीक्षा बैठक में बलरामपुर जिले के राजपुर में सड़क निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में लापरवाही पर संबंधित उप अभियंता को निलंबित करने और पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इतना ही नहीं, कवर्धा जिले में सड़क निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति को लेकर तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी अब सड़क निर्माण की योजनाओं में सिर्फ स्वीकृति और बजट आवंटन ही नहीं, बल्कि समय पर काम पूरा करने और तकनीकी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका भी समीक्षा के दायरे में है।
यह कार्रवाई रायपुर स्थित विकास भवन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) के तहत चल रहे कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान सामने आई। बैठक में निर्माण की गुणवत्ता, समय-सीमा, संधारण और लंबित परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई।
राजपुर में DPR पर लापरवाही, उप अभियंता पर कार्रवाई के निर्देश
बलरामपुर जिले के राजपुर में सड़क निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही का मामला सामने आया। DPR किसी भी सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसी के आधार पर निर्माण की योजना, तकनीकी जरूरतें और परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा तय होती है।
ऐसे में DPR तैयार करने में लापरवाही को गंभीर मानते हुए सचिव भीम सिंह ने संबंधित उप अभियंता को निलंबित करने और पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कवर्धा में भी धीमी रफ्तार पर जवाबदेही तय करने के निर्देश
समीक्षा के दौरान कवर्धा जिले में सड़क निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति का मामला भी उठा। यहां तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय समीक्षा में साफ संकेत दिया गया कि स्वीकृत परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मार्च 2027 तक 828 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के तहत सड़क निर्माण की प्रगति पर भी विशेष जोर दिया गया। इस योजना के अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों को मुख्य सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य है।
सचिव भीम सिंह ने मार्च 2027 तक 828 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। इसके लिए सभी स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में हर पात्र गांव तक पहुंचेगी सड़क
बैठक में बस्तर संभाग की सड़क संपर्क व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो चुके क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने का अवसर मिला है। इसका लाभ दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना चाहिए।
इसके लिए बस्तर संभाग के सभी क्षेत्रों का शत-प्रतिशत सर्वे कर पात्र गांवों और बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के निर्देश दिए गए। विशेष केंद्रीय सहायता योजना के तहत स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों को भी प्राथमिकता से पूरा करने पर जोर दिया गया।
अब ग्रामीण सड़कों पर CCTV से होगी भारी वाहनों की निगरानी
सड़क निर्माण के साथ उनके रखरखाव और सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने नई व्यवस्था के संकेत दिए हैं। PMGSY के तहत बनी सड़कों पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए CCTV कैमरे लगाए जाएंगे।
सचिव ने अधिकारियों को सड़क की भार क्षमता और भारी वाहनों के प्रतिबंध से संबंधित बड़े पोस्टर-बैनर लगाने के निर्देश दिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।
बिटुमिन की कमी से न रुके निर्माण, ठेकेदारों को पहले से तैयारी के निर्देश
सड़क निर्माण में बिटुमिन की संभावित कमी को देखते हुए ठेकेदारों को आवश्यक सामग्री की अग्रिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण में बाधा बन रही यूटिलिटी शिफ्टिंग को संबंधित विभागों से समन्वय कर जल्द पूरा कराने को कहा गया।
निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग को बढ़ावा देने और अनुपयोगी प्लास्टिक के संग्रहण में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
अब फाइलों की प्रगति नहीं, जमीन पर काम का हिसाब भी देना होगा
सड़क निर्माण की समीक्षा में राजपुर और कवर्धा के मामलों पर हुई कार्रवाई के निर्देशों से विभागीय जवाबदेही का मुद्दा सामने आया है। एक तरफ DPR तैयार करने में लापरवाही पर निलंबन और जांच के निर्देश हैं, तो दूसरी तरफ धीमी निर्माण प्रगति पर कार्यपालन अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
अब चुनौती केवल नई सड़कें स्वीकृत करने की नहीं, बल्कि उन्हें तय समय में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने की है। खासकर बस्तर और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार सरकारी योजनाओं की सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।
सवाल अब यही है कि जिन सड़कों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं बनती हैं, उनकी फाइल से लेकर निर्माण स्थल तक जिम्मेदारी किसकी होगी? विभागीय समीक्षा में कार्रवाई के निर्देशों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और निलंबन की प्रक्रिया किस नतीजे तक पहुंचती है।
