CGNews24 EXCLUSIVE: DMF घोटाले में 16 नए चेहरे, 7,500 पन्नों के सबूत! टेंडर के बदले 30% कमीशन का कथित खेल, ED ने खोली नेटवर्क की परतें
त्तीसगढ़ DMF घोटाले में ED ने सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए लोगों को आरोपी बनाया। 214 पन्नों की पूरक शिकायत और 7500 पन्नों के दस्तावेजों में टेंडर कमीशन नेटवर्क के आरोप।

छत्तीसगढ़ में खनिज से मिलने वाली रॉयल्टी का पैसा खनन प्रभावित इलाकों के विकास पर खर्च होना था, लेकिन DMF घोटाले की जांच में सामने आए आरोपों ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टेंडर किसे मिलेगा, किस कंपनी को काम दिया जाएगा और इसके बदले कितना कमीशन वसूला जाएगा—ED की जांच में एक ऐसे कथित नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है, जिसमें 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन का आरोप है। अब इस मामले में 16 नए लोगों को आरोपी बनाते हुए ED ने 214 पन्नों की पूरक शिकायत और करीब 7,500 पन्नों के दस्तावेज अदालत में पेश किए हैं।
16 नए आरोपी… 7,500 पन्नों के दस्तावेज… और सरकारी खजाने से कथित कमीशनखोरी का नेटवर्क। DMF घोटाले की जांच अब किस दिशा में बढ़ रही है?
EXCLUSIVE/CG NEWS 24. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाले की जांच अब एक और बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। खनिज संपदा से मिलने वाली रॉयल्टी के जरिए जिलों के विकास के लिए जुटाई गई सरकारी राशि आखिर किन रास्तों से ठेकेदारों और कथित बिचौलियों तक पहुंची? किस नेटवर्क के जरिए पसंदीदा कंपनियों को करोड़ों के टेंडर दिलाए गए? और बिना काम किए भुगतान लेने का खेल कैसे चला? प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पहली पूरक शिकायत ने इन सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
इस मामले में ED ने मुख्य आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए लोगों को आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में 214 पन्नों की पूरक शिकायत पेश की है, जिसके साथ करीब 7,500 पन्नों के दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। यानी जांच का दायरा अब पहले से कहीं अधिक विस्तृत हो गया है। पहले से दर्ज शिकायत में पूर्व आईएएस अधिकारी रानू साहू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब जांच के अगले चरण में सामने आए नए नामों और उनकी कथित भूमिका को लेकर ED ने अदालत का रुख किया है।
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू आरोपियों की बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि वह कथित सिस्टम है, जिसके जरिए DMF की विकास राशि को टेंडर, कमीशन और भुगतान के नेटवर्क में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
स्टोरी हाइलाइट्स
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DMF घोटाले में ED की पहली पूरक शिकायत दाखिल।
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सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए लोगों को बनाया आरोपी।
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214 पन्नों की शिकायत के साथ 7,500 पन्नों के दस्तावेज।
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पसंदीदा कंपनियों को टेंडर दिलाने के बदले 20 से 30 प्रतिशत कमीशन का आरोप।
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कई कार्य किए बिना पूरा भुगतान लेने का आरोप।
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पूर्व IAS अनिल टुटेजा की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज।
टेंडर से कमीशन तक… कैसे काम करता था कथित नेटवर्क?
ED की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, DMF की राशि से स्वीकृत विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में बिचौलियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुख्य आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा और उससे जुड़े लोग सरकारी अधिकारियों तथा निजी कंपनियों के बीच संपर्क सूत्र के रूप में काम करते थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर आवंटन समिति और ठेके हासिल करने की इच्छुक कंपनियों के बीच यह नेटवर्क सक्रिय था। पसंदीदा कंपनियों को बड़े-बड़े टेंडर दिलाने के लिए कथित तौर पर प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बदले 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है।
यानी विकास कार्यों के लिए जारी होने वाली सरकारी राशि का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर काम शुरू होने से पहले ही कमीशन के खेल में खप रहा था। जांच एजेंसी अब इसी नेटवर्क में शामिल लोगों, कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
बिना काम के भुगतान… कागजों में विकास, जमीन पर क्या हुआ?
इस घोटाले की जांच में सबसे गंभीर आरोप उन कार्यों को लेकर है, जिनके लिए DMF फंड से टेंडर स्वीकृत किए गए, लेकिन कथित तौर पर कई कार्य जमीन पर हुए ही नहीं। इसके बावजूद संबंधित कार्यों के एवज में पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया गया।
यदि जांच एजेंसी के आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह केवल टेंडर में अनियमितता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि विकास के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
ED ने इस नेटवर्क की पड़ताल के लिए बैंक खातों के लेन-देन, वित्तीय दस्तावेजों और आरोपियों के बीच हुए कथित आर्थिक व्यवहार की जांच की है। करीब 7,500 पन्नों के दस्तावेज इसी जांच का हिस्सा हैं। अब अदालत में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के बीच संबंध और कथित अपराध में उनकी भूमिका किस तरह स्थापित होती है।
16 नए आरोपी… जांच का दायरा कहां तक पहुंचा?
पहले से चल रही जांच में पूर्व आईएएस रानू साहू समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत पेश की जा चुकी है। अब सतपाल सिंह छाबड़ा सहित 16 नए लोगों को आरोपी बनाते हुए पहली पूरक शिकायत दाखिल की गई है।
यह घटनाक्रम बताता है कि ED की जांच केवल शुरुआती स्तर पर सामने आए आरोपियों तक सीमित नहीं रही। एजेंसी अब कथित बिचौलियों, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े लोगों और वित्तीय लेन-देन के जरिए सामने आए अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
214 पन्नों की शिकायत और 7,500 पन्नों के दस्तावेजों के जरिए जांच एजेंसी ने अदालत के सामने अपने आरोपों का विस्तृत आधार रखा है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज
DMF घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति एनके व्यास की पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को महत्वपूर्ण माना। अदालत के समक्ष यह तर्क भी सामने रहा कि आरोपी पूर्व में वरिष्ठ प्रशासनिक पद पर रह चुके हैं। अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम ने DMF घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की कानूनी लड़ाई को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
खनिज फंड से किसका विकास हुआ?
DMF की स्थापना का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। लेकिन जिस फंड का इस्तेमाल खनन प्रभावित परिवारों की जिंदगी बदलने के लिए होना चाहिए था, उसी राशि में कथित कमीशनखोरी और बिना काम भुगतान के आरोप सामने आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि इस कथित नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं? टेंडर दिलाने वाले बिचौलियों से लेकर भुगतान स्वीकृत करने वाले जिम्मेदार लोगों तक जांच की कड़ियां कहां तक पहुंचती हैं? और क्या आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े नाम सामने आएंगे?
DMF घोटाले की पहली पूरक शिकायत के साथ जांच का नया अध्याय खुल चुका है। 16 नए आरोपी, 214 पन्नों की शिकायत और 7,500 पन्नों के दस्तावेज… अब निगाहें अदालत की कार्यवाही और ED की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
