दुर्ग यूनिवर्सिटी के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप सस्पेंड, वित्तीय गड़बड़ी से फर्जी पीएचडी तक गंभीर आरोप

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट से संबद्धता का आदेश निरस्त होने के तीन दिन बाद राज्य शासन ने पूर्व कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 12 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया।
कुलदीप के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी वाहन के कथित दुरुपयोग, अधिकारों के इस्तेमाल में अनियमितता और एक महिला कर्मचारी के वेतन से जुड़ी राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरण से जुड़ी कार्रवाई भी चल रही है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
मामले का एक प्रमुख पहलू विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आरोप है कि कर्मचारी के निर्धारित वेतन में से एक बड़ी राशि उनके बजाय कुलदीप के बेटे के खाते में ट्रांसफर कराई गई।
इस मामले में दुर्ग के मोहन नगर थाने में 3 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, 6 फरवरी 2025 से 4 जुलाई 2026 के बीच कथित तौर पर 1,49,384 रुपये का लेनदेन हुआ। इस प्रकरण में कुलदीप की गिरफ्तारी और बाद में जमानत पर रिहाई की भी जानकारी प्रकाशित हुई है।
सरकारी वाहन और वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच
कुलदीप के खिलाफ सरकारी वाहन के कथित निजी इस्तेमाल और वाहन की मरम्मत से जुड़े बिलों में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इन मामलों की जांच के लिए उच्च शिक्षा आयुक्त स्तर पर समिति गठित की गई थी। वाहन के उपयोग और मरम्मत से संबंधित दस्तावेजों की जांच में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।
इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में अधिकारों के कथित दुरुपयोग और पीएचडी डिग्री से जुड़े मामले की जांच का भी उल्लेख रिपोर्ट में है। इन आरोपों को लेकर विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जानी है।
9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने निरस्त किया था संबद्धता आदेश
इस पूरे घटनाक्रम में 29 सितंबर का आदेश भी महत्वपूर्ण है। उच्च शिक्षा विभाग ने उस दिन कुलदीप को विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में संबद्ध किया था। इसके बाद उन्होंने इस आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी।
9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने संबद्धता के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद कुलदीप विश्वविद्यालय में पदभार ग्रहण करने पहुंचे, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके कार्यालय में ताला लगा मिला था। इसके तीन दिन बाद, 12 अक्टूबर को शासन ने निलंबन का नया आदेश जारी कर दिया।
निलंबन अवधि में रायपुर रहेगा मुख्यालय
जारी आदेश से संबंधित प्रकाशित जानकारी के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान भूपेंद्र कुमार कुलदीप का मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। विभागीय जांच के लिए अलग से आरोप पत्र जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
अब इस मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आपराधिक मामले में आरोप सिद्ध होने का अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन है।
