CG-अडानी फैक्ट्री में शराब का विवाद बना बवाल की वजह? मजदूरों की भिड़ंत से तोड़फोड़ तक, पुलिसकर्मी भी घायल

रायपुर। खरोरा के रायखेड़ा स्थित अडानी फैक्ट्री में सोमवार को शराब बिक्री के कथित विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि फैक्ट्री परिसर देखते ही देखते रणक्षेत्र में बदल गया। पहले मजदूरों के दो गुट आमने-सामने आए, फिर धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हुई। इसके बाद फैक्ट्री परिसर में तोड़फोड़ हुई और हालात संभालने पहुंची पुलिस के साथ भी धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। घटनाक्रम में एक पुलिसकर्मी के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
पूरे विवाद की शुरुआत फैक्ट्री परिसर में शराब बेचने की बात को लेकर होने की जानकारी सामने आ रही है। स्थानीय ग्रामीण भी गांव में शराब बिक्री का विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे को लेकर पहले से चल रहा तनाव सोमवार को अचानक भड़क गया।
मजदूरों के दो गुटों के बीच कहासुनी के बाद विवाद हाथापाई तक पहुंचा और देखते ही देखते दोनों पक्षों में जमकर मारपीट होने लगी। मामला केवल मजदूरों के बीच झड़प तक सीमित नहीं रहा और फैक्ट्री परिसर में तोड़फोड़ शुरू हो गई।
सरपंच की गाड़ी भी तोड़ी, फैक्ट्री परिसर में मचा हड़कंप
हंगामे के दौरान रायखेड़ा के सरपंच दिनेश वर्मा की गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भीड़ का गुस्सा किस स्तर तक पहुंच गया था।
फैक्ट्री जैसे औद्योगिक परिसर में विवाद का इस तरह हिंसक हो जाना अब सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अगर परिसर में शराब बिक्री को लेकर पहले से शिकायत या विरोध था, तो स्थिति बिगड़ने से पहले इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे—यह जांच का अहम बिंदु रहेगा।
पुलिस पहुंची तो विवाद और बढ़ा
बवाल की सूचना मिलते ही खरोरा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने और स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की होने की जानकारी सामने आई है। एक पुलिसकर्मी के घायल होने की बात भी कही जा रही है।
हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और फैक्ट्री तथा आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।
सबसे बड़ा सवाल: फैक्ट्री परिसर में शराब पहुंची कैसे?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू केवल मारपीट और तोड़फोड़ नहीं, बल्कि फैक्ट्री परिसर में शराब बिक्री के आरोप हैं।
यदि फैक्ट्री के भीतर शराब बेचे जाने की बात सही पाई जाती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई के परिसर में शराब की बिक्री किसकी निगरानी में चल रही थी? क्या प्रबंधन को इसकी जानकारी थी? क्या पहले भी इसको लेकर शिकायतें हुई थीं? और अगर ग्रामीण पहले से विरोध जता रहे थे, तो विवाद को समय रहते रोकने के लिए प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने क्या कदम उठाए? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा।
बाहरी मजदूरों को लेकर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक फैक्ट्री में दूसरे राज्यों से आए बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने अलग-अलग गुटों की सक्रियता और विवाद की आशंका को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि सोमवार की हिंसा में बाहरी मजदूरों की भूमिका कितनी थी और विवाद में कौन-कौन लोग शामिल थे, यह अभी पुलिस जांच का विषय है। इसलिए इस पहलू पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
अब प्रबंधन की जवाबदेही भी जांच के घेरे में
घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई तो शुरू हो गई है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण सवाल बनकर सामने आई है। एक औद्योगिक परिसर में शराब बिक्री के आरोप से शुरू हुआ विवाद मारपीट, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मी के घायल होने तक पहुंच गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि विवाद की शुरुआत किस
