बारिश की बूंद-बूंद बचाकर छत्तीसगढ़ ने रचा जल क्रांति का मॉडल, देश में नंबर-1! PM मोदी के सामने CM साय ने बताया जल संरक्षण का ‘CG मॉडल’

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ अव्वल, 28 लाख से ज्यादा जल संरचनाओं का निर्माण-पंजीयन; कोरिया के किसानों का 5% मॉडल बना राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र


रायपुर, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे जमीन के भीतर पहुंचाने की जनभागीदारी आधारित मुहिम में प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।

सबसे खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह प्रदेश में जल संरक्षण को सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर जनअभियान बनाया गया है।

PM मोदी के सामने छत्तीसगढ़ का जल मॉडल

नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी के प्रयासों की जानकारी दी।

सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेश में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल समेत विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

‘खेत का 5 प्रतिशत हिस्सा पानी के नाम’—कोरिया मॉडल ने खींचा ध्यान

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ को विशेष रूप से रेखांकित किया। इस मॉडल में किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं।

यानी जिस जमीन पर फसल उगती है, उसी खेत का एक हिस्सा बारिश का पानी रोकने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। उद्देश्य साफ है—पानी खेत से बहकर बाहर न जाए, बल्कि वहीं रुके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचे। यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। किसान सिर्फ योजना के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण के सीधे भागीदार बन रहे हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

पंचायतें, स्थानीय समुदाय और विभिन्न विभाग मिलकर जल संरचनाएं तैयार कर रहे हैं। इन संरचनाओं की जियो-टैगिंग, मॉनिटरिंग और नियमित समीक्षा भी की जा रही है।

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल

जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। अभियान के आंकड़ों के मुताबिक— JSJB 1.0: 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। JSJB 2.0: 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 23 लाख 7 हजार 768 का काम पूरा हो चुका है। JSJB 3.0: 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 77 हजार 719 का काम पूरा हो चुका है। तीनों चरणों को मिलाकर प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन किया गया है।

पहले और दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा था। तीसरे चरण में प्रदेश ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए देश में नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया।

छत्तीसगढ़ के 5 जिले भी टॉप-10 में

राज्य ही नहीं, छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में गांव और पंचायत स्तर पर बारिश के पानी को रोकने, जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कामों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया गया।

26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

जल संरक्षण के प्रयासों के बीच प्रदेश में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या में भी कमी आने की बात सामने आई है। राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है।

पुराने जल स्रोतों का संरक्षण, नई जल संरचनाओं का निर्माण, भू-जल पुनर्भरण, मैपिंग और नियमित निगरानी को इसके पीछे अहम प्रयास बताया गया है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ को जमीन पर उतार रहा प्रदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने का प्रयास किया है।

प्रदेश की भौगोलिक विविधता को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।सरकार का फोकस है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे भू-जल पुनर्भरण बढ़ाने के साथ सिंचाई और पेयजल के लिए स्थानीय जल उपलब्धता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

CM साय ने दिए देश के लिए तीन बड़े सुझाव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय सम्मेलन में जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप और भू-जल स्थिति के आधार पर अपना अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने— स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने, BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग मजबूत करने, हर तीन महीने में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अभियान की समीक्षा करने का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी का समन्वय जल संरक्षण को ज्यादा प्रभावी बना सकता है।

2 करोड़ नई जल संरचनाओं के राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ की भूमिका

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बन सकता है। खासकर कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल यह दिखाता है कि यदि किसान स्वयं जल संरक्षण के लिए आगे आएं तो खेतों को ही छोटे-छोटे जल पुनर्भरण केंद्रों में बदला जा सकता है।

बारिश का पानी खेत में रुकेगा तो भू-जल स्तर सुधारने, सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने और खेती की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अब छत्तीसगढ़ की असली परीक्षा

देश में नंबर-1 की उपलब्धि निश्चित तौर पर बड़ी है, लेकिन असली चुनौती अब इन जल संरचनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने की होगी।

क्या 5 प्रतिशत मॉडल दूसरे जिलों और राज्यों तक पहुंचेगा? क्या जल संरचनाओं की नियमित मॉनिटरिंग से उनका वास्तविक असर जमीन पर दिखाई देगा? और क्या इससे आने वाले वर्षों में भू-जल संकट और कम होगा?

इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि छत्तीसगढ़ की यह पहल सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि बनती है या वास्तव में देश के लिए एक स्थायी जल संरक्षण मॉडल साबित होती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

cgnews24 Team

CGNews24 Team अनुभवी पत्रकारों और उत्साही लेखकों का एक समर्पित समूह। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्दों से लेकर देश-दुनिया की प्रमुख घटनाओं की सबसे तेज़, सटीक और निष्पक्ष कवरेज 24x7 आप तक पहुँचाना है। हमसे जुड़ें: संपर्क करें (Email) | हमारी संपादकीय नीति पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

होमछत्तीसगढ़ खबरेंराजनीतिWhatsapp