IPS रतनलाल डांगी पर कथित उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट सख्त, गृह विभाग और PHQ से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला योगा शिक्षिका द्वारा लगाए गए कथित उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। महिला योगा शिक्षिका की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव और पुलिस मुख्यालय (PHQ) को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई में सरकार और पुलिस मुख्यालय का पक्ष सामने आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
महिला योगा शिक्षिका ने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की मौजूदा जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामले की जांच जिस तरीके से की जा रही है, उसमें निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल हैं।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच पुलिस अधिकारियों के बजाय किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो सके।
तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा की भूमिका पर आपत्ति
याचिका में तत्कालीन आईजी आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि आनंद छाबड़ा और आरोपी अधिकारी रतनलाल डांगी समान रैंक के अधिकारी रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा की गई जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
याचिका में आनंद छाबड़ा से संबंधित अन्य लंबित जांच का भी उल्लेख किया गया है और इसी आधार पर उनकी जांच भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
DIG मिलना कुर्रे की जांच पर भी सवाल
इसी तरह तत्कालीन डीआईजी मिलना कुर्रे की भूमिका को लेकर भी याचिका में आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मिलना कुर्रे रतनलाल डांगी से जूनियर रैंक की अधिकारी थीं। ऐसे में उनके द्वारा इस मामले की जांच कराया जाना उचित नहीं था।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से मांग की है कि मामले की जांच ऐसे अधिकारी से कराई जाए, जिसकी भूमिका को लेकर किसी तरह का हितों का टकराव या निष्पक्षता पर सवाल न उठे।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ की संपत्तियों की जांच की मांग
मामले में याचिकाकर्ता ने आईपीएस रतनलाल डांगी की छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कथित तौर पर अर्जित अचल संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही याचिका में गंभीर आरोपों को देखते हुए उन्हें निलंबित करने और आरोप सिद्ध होने की स्थिति में सेवा से बर्खास्त करने की मांग भी की गई है।
अब सरकार के जवाब पर टिकी नजर
फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में गृह विभाग के सचिव और पुलिस मुख्यालय से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर सभी की नजर रहेगी। कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है और मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई जारी है।
