छत्तीसगढ़ में ‘संस्कृत प्रार्थना’ पर विवाद: आदिवासी नेता बोले – आदिवासी हिंदू नहीं, उन पर धार्मिक प्रथाएं न थोपी जाएं


रायपुर, 19 जून 2026। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र और संस्कृत प्रार्थनाओं को शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले पर नया विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं और उन पर किसी विशेष धर्म की परंपराएं थोपना उचित नहीं है।

मनीष कुंजाम ने कहा कि आदिवासी समुदाय की अपनी अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। ऐसे में स्कूलों के माध्यम से किसी एक धर्म से जुड़ी प्रार्थनाओं को अनिवार्य करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

दरअसल, राज्य सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में राष्ट्रीय गान और अन्य गतिविधियों के साथ गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और संस्कृत प्रार्थनाओं के पाठ का निर्देश जारी किया है। इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

वहीं, सरकार का कहना है कि इन प्रार्थनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित करना है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इसका किसी राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे से कोई संबंध नहीं है।

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