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जनसेवा ही जिनका उत्सव है…..जन्मदिन की रात 12.25 बजे भी जनता की समस्याएं सुनते रहे मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai

यह तस्वीर केवल एक राजनेता की कार्यशैली को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णुदेव साय जी के उस सेवा भाव को दर्शाती है जो आज के दौर में विरल है। जहाँ लोग जन्मदिन की आधी रात जश्न और परिवार के साथ बिताते हैं, वहां हमारे मुख्यमंत्री जन-गण-मन की चिंता में लीन हैं।

रायपुर, 21 फ़रवरी 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके लिए पद नहीं, बल्कि सेवा सबसे बड़ा दायित्व है। 21 फरवरी की रात 12.25 बजे, जब पूरा प्रदेश उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहा था, तब मुख्यमंत्री किसी उत्सव में नहीं, बल्कि अपने विशेष अतिथि कक्ष में बैठकर दूर-दराज के गांवों से आए लोगों की समस्याएं सुन रहे थे।


जन्मदिन जैसे निजी अवसर पर भी मुख्यमंत्री ने किसी प्रकार का औपचारिक जश्न नहीं मनाया। परिवार के साथ समय बिताने की बजाय उन्होंने प्रदेश की जनता को ही अपना परिवार मानते हुए उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी। वे स्वयं दस्तावेजों को बारीकी से पढ़ते नजर आए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की प्रक्रिया में जुटे रहे।


मुख्यमंत्री की यह कार्यशैली उनके संवेदनशील नेतृत्व और जनप्रतिबद्धता को दर्शाती है। वर्षों से आदिवासी अंचलों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े रहे विष्णुदेव साय का राजनीतिक जीवन सादगी, समर्पण और सेवा भाव के लिए जाना जाता रहा है। यही कारण है कि उन्हें जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह नेता के रूप में देखा जाता है।


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विकास कार्यों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोण से किया जा सकता है, लेकिन आधी रात को भी आम लोगों की समस्याएं सुनना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री का ध्यान सत्ता के वैभव पर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर केंद्रित है।
प्रदेशवासियों ने भी मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु और निरंतर जनसेवा के संकल्प की कामना की है। जनसेवा को ही उत्सव मानने वाले ऐसे नेतृत्व को प्रदेश के लिए सौभाग्य बताया जा रहा है।

संवेदनशीलता और जवाबदेही का संगम
मुख्यमंत्री जी का स्वयं दस्तावेजों को बारीकी से पढ़ना और आधी रात को भी जनता के लिए सुलभ होना यह प्रमाणित करता है कि उनके लिए ‘प्रदेश ही परिवार’ है। यह समर्पण सालों की तपस्या और जनता के प्रति उनके निस्वार्थ त्याग का परिणाम है।

“जब नेतृत्व की मंशा न्याय करने की हो, तो घड़ी की सुइयां और नींद की थकान कभी बाधा नहीं बनतीं।”

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