Bilaspur News: 8 शिक्षकों का भार नहीं उठा सकी सरकार, 200 बच्चों का भविष्य संकट में…पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने सरकार को घेरा, बोले – कलेक्टर जवाब दें…
स्वामी आत्मानंद के मासूम बच्चों के भविष्य कलेक्टर और डीईओ भी नहीं बचा पाए, बीजेपी सरकार स्वामी आत्मानंद योजना की लोकप्रियता से खुश नहीं है - शैलेष
Bilaspur News: बिलासपुर, 12 जनवरी 2025.पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना छत्तीसगढ़ के उन हज़ारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनी थी, जिनके माता-पिता महंगे निजी स्कूलों की फीस चुकाने में असमर्थ थे। इस योजना ने पहली बार गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को निशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और अंग्रेज़ी माध्यम की शिक्षा का अवसर दिया। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यही लोकप्रिय योजना बीजेपी सरकार के लिए असहज होती नज़र आ रही है। आरोप है कि सरकार की उदासीनता और कथित साजिश का खामियाजा अब सबसे मासूम वर्ग “नर्सरी के बच्चों” को भुगतना पड़ रहा है, जिससे न केवल उनके वर्तमान बल्कि भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।
बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडेय का कहना है कि बिलासपुर में नर्सरी में मात्र दो सौ बच्चे पढ़ते है और केवल आठ शिक्षक उनको पढ़ाते है क्या सरकार उनके वेतन की व्यवस्था कहीं से भी नहीं कर सकती थी क्या DMF फण्ड ही सहारा था अगर डीएमएफ के नियम बदल गए है तो संविदा फण्ड जो हर वर्ष लैप्स हो जाता है उसी से इन शिक्षकों को सैलरी दे सकते थे लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है और बिलासपुर के कलेक्टर भी रुचि नहीं लिए कि इन बच्चों की पढ़ाई बंद न हो और वो भी सरकार सोंच से काम कर रहे है।
उनका कहना है कि बिलासपुर कलेक्टर को सरकार से बात करनी चाहिए और एक अलग मद से इनका भुगतान करके इन बच्चों के भविष्य को बचाना चाहिए नहीं तो ऐसे में उनकी प्रारंभिक पढ़ाई का क्या होगा और फिर बीजेपी सरकार पहले की तरह स्कूल बंद करो यही ढर्रा अपनाती रही है।बिलासपुर से शुरू हुई स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना को आज बीजेपी सरकार ने बलि चढ़ाने की शुरुआत कर दिया है।सरकार से अनुरोध है कि वो इन बंद स्कूलों को पुनः चालू करे और मासूम बच्चों के भविष्य को ख़राब न करें।









