जल संकट से बचने छत्तीसगढ़ सरकार लाने जा रही विधेयक, पानी की बर्बादी पर होगी सजा….सरकार मानसून सत्र में पेश कर सकती है विधेयक
जमीन भू- जल स्तर को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार समग्र जल विधेयक लाने जा रही है, राज्य सरकार ये विधेयक मानसून सत्र में पेश करने वाली है, विधेयक पास होने के बाद राज्य में पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की मात्रा तय की जाएगी। साथ ही पानी की बेहतर उपयोग, सरंक्षण और पानी की बर्बादी रोकने के लिए कड़ी प्रावधान बनाई जाएगी |
बता दें कि राज्य में अभी तक कोई अथाॅरिटी नहीं बनाई गई है, राज्य में 1932 के कानून के आधार पर जल प्रबंधन किया जाता है, जिसके कारण उद्योगों के बोर खनन के लिए आज भी केंद्रीय भूजल बोर्ड से मंजूरी लेनी पड़ती है।
यह विधेयक पारित होने पर एक रेग्युलेटरी अथाॅरिटी भी बनाई जाएगी, जिसका हस्तक्षेप और सीधा नियंत्रण होगा। पानी के बेहतर उपयोग के साथ-साथ भविष्य में आने वाले संकट को ध्यान में रखकर प्लानिंग की जाएगी, वहीं पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी कानून बनाया जाएगा।
बता दें कि गर्मी में पेयजल संकट को दूर करने के लिए नई जलप्रदाय योजना के तहत पाइपलाइन विस्तार के लिए 78 करोड़ 40 लाख और टंकियों के निर्माण के लिए जल आवर्धन योजना के तहत 50 करोड़ 94 लाख का प्रावधान किया है। वहीं केंद्र सरकार की योजना अमृत मिशन के लिए प्रदेश के नौ शहर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर को चुना गया है। इस योजना से सभी नौ शहरों की जनता को चौबीसों घंटे पेयजल मिल सकेगा। इस योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने 396 करोड़ का बजट रखा है।









