7 साल से उड़ान का इंतजार, अब ‘उल्टा मार्च’! बिलासपुर एयरपोर्ट के लिए स्थाई ATC टॉवर की मांग…देखिये Video

बिलासपुर@cgnews24.com/छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बेहतर हवाई सुविधा की मांग को लेकर चल रहा जन आंदोलन सात साल पूरे कर चुका है, लेकिन बड़े विमानों के संचालन और महानगरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी का मुद्दा अब भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। आंदोलन की सातवीं वर्षगांठ पर हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर ‘उल्टा मार्च’ निकाला। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देने की मांग की।
हवाई समिति का कहना है कि बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर को उसकी जरूरतों के अनुरूप हवाई सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सात साल से जारी आंदोलन के बावजूद एयरपोर्ट के विस्तार और बड़े विमानों के संचालन का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर नागरिकों ने उल्टा मार्च निकालकर अपनी नाराजगी और निराशा जाहिर की।
हाईकोर्ट, रेलवे और SECL का मुख्यालय, फिर भी सीमित हवाई सुविधा
समिति ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में बिलासपुर के आर्थिक, प्रशासनिक और संस्थागत महत्व का उल्लेख किया है। बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट स्थित है। इसके अलावा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का मुख्यालय और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का मुख्यालय भी यहीं है। शहर में केंद्रीय विश्वविद्यालय और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं भी संचालित हैं।
समिति का तर्क है कि इतने महत्वपूर्ण संस्थानों और आर्थिक गतिविधियों वाले शहर में बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता है। इसके बावजूद बिलासपुर से बड़े शहरों के लिए सीधी उड़ानों और बड़े विमानों के संचालन की सुविधा सीमित बनी हुई है।
3C से 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की मांग
हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति के मुताबिक, आंदोलन के दबाव में बिलासपुर में 3C श्रेणी का एयरपोर्ट विकसित किया गया, जहां एटीआर जैसे छोटे विमानों का संचालन होता है। हालांकि, समिति का कहना है कि उड़ानों की सीमित संख्या और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण शहर की हवाई कनेक्टिविटी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
समिति बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की मांग कर रही है। इससे बड़े विमानों के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास का रास्ता खुल सकता है। समिति ने देश के चारों महानगरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की मांग भी उठाई है।
रनवे 1,500 से बढ़ाकर 2,800 मीटर करने की मांग
एयरपोर्ट के विस्तार के लिए समिति ने करीब 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई है। प्रस्तावित कार्यों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- रनवे का विस्तार: मौजूदा रनवे को लगभग 1,500 मीटर से बढ़ाकर 2,800 मीटर करना।
- स्थायी एटीसी टावर: हवाई यातायात नियंत्रण के लिए स्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर का निर्माण।
- नया टर्मिनल भवन: यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए टर्मिनल का निर्माण।
समिति का दावा है कि रनवे विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। उसका कहना है कि इन कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान मिलने पर एयरपोर्ट के विकास को गति मिल सकती है।
राजस्व में योगदान, फिर भी विशेष सहायता नहीं मिलने का आरोप
समिति ने ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया है कि बिलासपुर संभाग कोयला, ऊर्जा और रेलवे माल ढुलाई के लिहाज से महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके बावजूद एयरपोर्ट के विस्तार के लिए अपेक्षित विशेष आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।
समिति का आरोप है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से उड़ान योजना के तहत मिलने वाली सहायता शहर की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर उसने केंद्र सरकार से बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए अलग से बजट उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग, दो साल में अपग्रेड करने का प्रस्ताव
आंदोलन की सातवीं वर्षगांठ पर निकाले गए ‘उल्टा मार्च’ के जरिए समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की अपील की है। समिति ने दो विकल्प सामने रखे हैं। पहला, केंद्र सरकार बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान स्वीकृत करे। दूसरा, छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह अगले दो वर्षों के भीतर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की प्रक्रिया पूरी करे।
सात साल से जारी यह आंदोलन अब एक बार फिर बिलासपुर की हवाई कनेक्टिविटी के सवाल को सामने लेकर आया है। अब देखना होगा कि एयरपोर्ट के विस्तार की मांग पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
