29 लाख की डील, नौकरी-डीलरशिप और ठेके का दावा… NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे पर गंभीर आरोप
युवक ने रायपुर पुलिस कमिश्नर और CM से की शिकायत, बैंक ट्रांजेक्शन का भी किया जिक्र; भाई और चाचा के नाम भी शिकायत में, मामले की जांच बाकी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे पर एक युवक ने 29 लाख रुपये से अधिक की रकम लेने और काम नहीं कराने का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि अलग-अलग कामों के नाम पर उससे रकम ली गई, लेकिन वादा किए गए काम पूरे नहीं हुए।
मामले में शिकायतकर्ता ने रायपुर पुलिस कमिश्नर के साथ मुख्यमंत्री से भी न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में नीरज पांडे के अलावा उनके भाई दीपक पांडे और चाचा इंद्रासन पांडे के नाम भी शामिल किए गए हैं।
नौकरी से डीलरशिप तक… कई वादों का दावा
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे सिप्ला कंपनी की एजेंसी/डीलरशिप दिलाने का भरोसा दिया गया था। इसके अलावा DKS अस्पताल में नौकरी और कैंटीन का ठेका दिलाने की बात भी कही गई थी।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि उसकी पत्नी को मंत्रालय में नौकरी दिलाने और रेत खदान दिलाने का आश्वासन दिया गया था। इन्हीं अलग-अलग दावों के आधार पर रकम लिए जाने का आरोप शिकायतकर्ता ने लगाया है।
29 लाख से ज्यादा रकम का हिसाब?
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में अलग-अलग भुगतान और बैंक ट्रांजेक्शन का भी उल्लेख किया है। उसका आरोप है कि रकम लेने के बाद बताए गए किसी भी काम को पूरा नहीं कराया गया।
अब शिकायत में किए गए दावों और बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम किस उद्देश्य से और किन परिस्थितियों में दी गई थी।
शिकायत में भाई और चाचा के नाम भी
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि शिकायत में नीरज पांडे के साथ उनके भाई दीपक पांडे और चाचा इंद्रासन पांडे के नाम भी शामिल किए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह आरोप भी लगाया है कि यदि उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए इन लोगों को जिम्मेदार माना जाए।
राजनीतिक पद से जुड़ा होने के कारण मामला चर्चा में
नीरज पांडे NSUI के प्रदेश अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनके खिलाफ 29 लाख रुपये से अधिक की कथित ठगी की शिकायत सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है।
हालांकि, फिलहाल यह पूरा मामला शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में दूसरा पक्ष
शिकायत सामने आने के बाद अब नीरज पांडे और शिकायत में नामजद अन्य लोगों का पक्ष महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट में आरोपों की पुलिस जांच होना बाकी बताया गया है। इसलिए फिलहाल 29 लाख रुपये की कथित ठगी को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल पुलिस के सामने शिकायत और उसमें लगाए गए आरोप हैं। मामले में बैंक ट्रांजेक्शन, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, कथित वादों और दोनों पक्षों के बयान जांच का अहम हिस्सा होंगे। जांच के बाद ही यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे कानूनी कार्रवाई की स्थिति बनती है या नहीं।

