झारखंड शराब घोटाला: IAS अनिल टुटेजा को मिली जमानत, छत्तीसगढ़ कोर्ट ने लगाई शर्तें
बिलासपुर, 05 मई 2026। निलंबित आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को कथित झारखंड शराब घोटाले से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करना है। यदि वे शर्तों का पालन नहीं करते हैं, तो जांच एजेंसी को उनकी जमानत निरस्त कराने की छूट रहेगी।

हालांकि, इस राहत के बावजूद उनका जेल से बाहर आना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही डीएमएफ और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चर्चित मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
क्या हैं आरोप
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120B के तहत केस दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब कारोबार के लिए सिंडिकेट तैयार किया। इस सिंडिकेट के जरिए आबकारी नीति में बदलाव कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और करोड़ों रुपए का कमीशन लिया गया।

बचाव पक्ष का तर्क
टुटेजा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में फंसाकर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। यह भी दलील दी गई कि झारखंड पुलिस ने जिस मामले में एफआईआर दर्ज की है, उसमें उन्हें आरोपी तक नहीं बनाया गया है। साथ ही, पिछले पांच वर्षों में कई एजेंसियों की जांच के बावजूद उनके पास से कोई अवैध संपत्ति या ठोस सबूत नहीं मिला।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए टुटेजा को कई घोटालों का मास्टरमाइंड बताया। सरकार ने दलील दी कि उन्होंने रायपुर में बैठकों के जरिए झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया।

कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि टुटेजा पिछले करीब दो साल से जेल में हैं, लेकिन इस नए मामले में उनसे पूछताछ के लिए एजेंसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। साथ ही, झारखंड में भी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है और वहां के कुछ आरोपियों को पहले ही










