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कहां रहेंगे कवासी लखमा? जेल से रिहा होने के बाद छत्तीसगढ़ से बाहर चुना यह राज्य, ये है वजह

रायपुर, 6 फ़रवरी 2026 — शराब घोटाले के जटिल मामलों में लगभग एक वर्ष जेल में बिताने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लखमा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं के भीतर नहीं रहेंगे और उन्हें निर्धारित नियमों के तहत दूसरी जगह पर निवास करना होगा।

सूत्रों के मुताबिक, कवासी लखमा ने ओडिशा के मलकानगिरी जिले में अस्थायी तौर पर रहने का निर्णय किया है, जो उनके निजी आवास से मात्र कुछ किलोमीटर दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह स्थान उनके सामाजिक और पारिवारिक संपर्क को बनाए रखने में मदद करेगा।

न्यायालय ने जमानत की शर्तों में यह भी कहा है कि लखमा को अपने निवास वाले जिले के स्थानीय थाना में प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके अलावा उन्होंने बिना अनुमति छत्तीसगढ़ में प्रवेश नहीं करने का आदेश भी शामिल है।

ज्ञात हो कि बस्तर के कोंटा विधानसभा क्षेत्र से सक्रिय राजनीति करने वाले लखमा कई बार विधायक रह चुके हैं और आदिवासी राजनीति में प्रभावशाली चेहरे के रूप में जाने जाते रहे हैं। जेल से उनकी रिहाई और राज्य से बाहर रहना अब बस्तर की सियासी परिस्थितियों पर अहम प्रभाव डाल सकता है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं।

लखमा की रिहाई को लेकर समर्थकों में राहत और उत्साह का माहौल है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले समय में बस्तर की राजनीति के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, जमानत की शर्तों के चलते वे फिलहाल सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे।

गौरतलब है कि कवासी लखमा कोंटा विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक हैं, जो कि बस्तर संभाग के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में से एक है। लंबे समय से आदिवासी राजनीति में सक्रिय लखमा बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस का बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं। उनके जेल जाने के बाद न सिर्फ कोंटा बल्कि पूरे बस्तर की राजनीति में हलचल देखने को मिली थी।

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