तीन IPS, तीन नई कुर्सियां और दिल्ली की मंजूरी! छत्तीसगढ़ में DG प्रमोशन पर फिर क्यों मचा घमासान?
2018 में भी एक्स कैडर पदों पर प्रमोशन को लेकर हुआ था विवाद, तीन अफसरों की पदोन्नति रद्द करनी पड़ी थी; अब फिर उसी व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर@cgnews24/ छत्तीसगढ़ में तीन आईपीएस अधिकारियों को पुलिस महानिदेशक (DG) स्तर पर पदोन्नत करने की तैयारी ने पुलिस महकमे में नई बहस छेड़ दी है। राज्य कैबिनेट ने तीन नए एक्स कैडर पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति को लेकर सवाल बरकरार हैं। प्रस्ताव अब केंद्र के पास भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राज्य में पहले से डीजी स्तर के चार पद संचालित हैं, तो तीन अतिरिक्त पदों की जरूरत क्यों पड़ी?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत 1994, 1995 और 1996 बैच के आईपीएस अधिकारियों को डीजी स्तर पर पदोन्नत करने की तैयारी है। मामला इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि वर्ष 2018 में तत्कालीन रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में इसी तरह तीन एक्स कैडर डीजी पदों पर पदोन्नति को लेकर विवाद हुआ था। केंद्र की असहमति के बाद मामला अदालत पहुंचा और बाद में इन पदोन्नतियों को वापस लेना पड़ा था। अब उसी तरह की स्थिति दोबारा बनने की आशंका जताई जा रही है।
चार पद पहले से भरे, फिर तीन नए पद क्यों?
छत्तीसगढ़ में डीजी स्तर के दो स्वीकृत कैडर पद और दो एक्स कैडर पद बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी चार पद पहले से भरे हुए हैं। डीजीपी अरुणदेव गौतम और जीपी सिंह कैडर पदों पर हैं, जबकि पवन देव और हिमांशु गुप्ता एक्स कैडर पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ऐसे में तीन और पद बनाने के प्रस्ताव ने कैडर व्यवस्था और प्रशासनिक जरूरत को लेकर सवाल खड़े किए हैं। 21 मई 2025 को हुई आईपीएस कैडर समीक्षा में दो एक्स कैडर पदों का उल्लेख होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। ऐसे में तीन अतिरिक्त पदों का प्रस्ताव किस प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर तैयार किया गया, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
गृह मंत्रालय की मंजूरी क्यों है अहम?
आईपीएस कैडर की स्वीकृत संख्या और उससे जुड़े पदों की व्यवस्था में केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। एक्स कैडर पद वे पद होते हैं, जो नियमित कैडर पदों से अलग बनाए जाते हैं। ऐसे पदों की संख्या और उन पर नियुक्ति के लिए लागू नियमों का पालन जरूरी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी का सवाल अभी बाकी है। ऐसे में केवल राज्य कैबिनेट की स्वीकृति के आधार पर आगे की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी हो पाएगी या नहीं, यह केंद्र के निर्णय और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
2018 में क्या हुआ था?
इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वर्ष 2018 का घटनाक्रम है। रिपोर्ट के अनुसार, 4 दिसंबर 2017 को तत्कालीन रमन सिंह सरकार की कैबिनेट ने तीन एक्स कैडर डीजी पद बनाने का फैसला किया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2018 को संजय पिल्लै, आरके विज और मुकेश गुप्ता को डीजी स्तर पर पदोन्नत किया गया।
हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन अतिरिक्त पदों को मंजूरी नहीं दी थी। बाद में भूपेश बघेल सरकार ने इन पदोन्नतियों को रद्द कर दिया। मामला अदालत पहुंचा और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही माना। इस घटनाक्रम के कारण मौजूदा प्रस्ताव को लेकर भी नियमों के पालन और केंद्र की स्वीकृति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अब केंद्र के फैसले पर नजर
तीन अतिरिक्त डीजी पदों के प्रस्ताव पर अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि केंद्र की मंजूरी मिलती है, तो आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सकता है। यदि मंजूरी नहीं मिलती या प्रस्ताव में बदलाव की जरूरत बताई जाती है, तो पदोन्नति की योजना प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम सवाल तीन अधिकारियों की पदोन्नति से आगे का है—क्या प्रस्ताव कैडर नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप है? वर्ष 2018 का अनुभव इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाता है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है।
