CGPSC Big Update: छत्तीसगढ़ मुख्य सेवा परीक्षा के सिलेबस में बदलाव की तैयारी, अभ्यर्थी भी दे सकेंगे सुझाव; आयोग ने जारी किया लिंक
रायपुर, 8 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा (Main Examination) के पाठ्यक्रम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार सबसे खास बात यह है कि आयोग सिलेबस में संशोधन से पहले अभ्यर्थियों की राय भी लेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवार अब सीधे अपने सुझाव आयोग तक पहुंचा सकेंगे।
इसके लिए CGPSC ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक विशेष लिंक उपलब्ध कराया है, जिसके माध्यम से अभ्यर्थी परीक्षा पाठ्यक्रम में किए जाने वाले संभावित बदलावों को लेकर अपने सुझाव और विचार ऑनलाइन भेज सकेंगे। आयोग का उद्देश्य अभ्यर्थियों और विषय विशेषज्ञों की राय के आधार पर अधिक व्यावहारिक और समयानुकूल पाठ्यक्रम तैयार करना है।
पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन
आयोग के अनुसार सुझाव देने के लिए उम्मीदवारों को पहले CGPSC की वेबसाइट पर पंजीकरण (Registration) करना होगा। जो अभ्यर्थी पहले से पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं, वे अपनी पुरानी यूजर आईडी और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन कर सीधे सुझाव दर्ज कर सकेंगे।
CGPSC ने सूचना जारी होने की तारीख से एक माह तक सुझाव भेजने का समय निर्धारित किया है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और आधिकारिक सूचना आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है।
इस साल की परीक्षा पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि, आयोग की ओर से शुरू की गई यह प्रक्रिया मौजूदा वर्ष की परीक्षा को प्रभावित नहीं करेगी। हर वर्ष की तरह CGPSC राज्य सेवा परीक्षा का विज्ञापन 26 नवंबर (संविधान दिवस) के आसपास जारी किए जाने की संभावना है। अधिकांश अभ्यर्थी पहले से ही वर्तमान सिलेबस के आधार पर तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि प्रस्तावित संशोधित पाठ्यक्रम CGPSC-2026 की मुख्य परीक्षा में लागू नहीं होगा, बल्कि इसे आगामी परीक्षा चक्र में लागू किया जा सकता है।
फिलहाल ऐसा है मेन्स परीक्षा का पैटर्न
वर्तमान परीक्षा प्रणाली के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा (Mains) देनी होती है। मेन्स परीक्षा में 7 अनिवार्य प्रश्नपत्र होते हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र 200 अंकों का होता है और कुल अंक 1400 निर्धारित हैं।
इन प्रश्नपत्रों में भाषा, निबंध और सामान्य अध्ययन से जुड़े विषय शामिल हैं। सभी प्रश्नपत्र वर्णनात्मक (Descriptive) होते हैं, जिनमें अभ्यर्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, अभिव्यक्ति और विषय की गहराई का आकलन किया जाता है।
सिलेबस में बदलाव से क्या होगा फायदा?
समय-समय पर पाठ्यक्रम की समीक्षा से परीक्षा प्रणाली अधिक प्रासंगिक और समकालीन बनती है। अभ्यर्थियों से सीधे सुझाव लेने की पहल से आयोग को प्रतियोगी परीक्षाओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप सिलेबस तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

