शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला : 28 साल पुरानी भर्ती, 320 शिक्षाकर्मी और 6 तत्कालीन अफसर समेत 22 आरोपियों के नाम, 1000 पन्नों का चालान पेश

कवर्धा@cgnews24.com(9301866621)। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में करीब 28 साल पुरानी शिक्षाकर्मी भर्ती अब कानूनी कार्रवाई के बड़े मामले में बदल गई है। पंडरिया जनपद पंचायत में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर हुई भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो ने विशेष न्यायालय, कवर्धा में करीब 1,000 पन्नों का चालान पेश किया है। मामले में छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों समेत कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इस भर्ती पर सवाल सिर्फ चयन सूची तक सीमित नहीं हैं। जांच में आरोप है कि साक्षात्कार के अंकों में हेरफेर हुआ, अध्यापन अनुभव के बोनस अंक देने में नियमों का पालन नहीं किया गया, आरक्षण प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई और चयन समिति के सदस्यों के रिश्तेदारों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाया गया। करीब तीन दशक पुराने इस मामले में अब न्यायालय में आगे की सुनवाई होगी।
शिकायत से शुरू हुई थी जांच, अब अदालत पहुंचा मामला
पंडरिया जनपद पंचायत में 25 दिसंबर 1998 को शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया को लेकर तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने शिकायत की थी। शिकायत में साक्षात्कार पंजी में काट-छांट, नियमित छात्र रहे अभ्यर्थियों को अध्यापन अनुभव के अंक देने, आरक्षण नियमों के उल्लंघन और चयन समिति के सदस्यों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।
इसी शिकायत के आधार पर वर्ष 2000 में अपराध क्रमांक 48/2000 दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। अब ब्यूरो ने विवेचना में जुटाए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर चालान पेश किया है।
मेरिट लिस्ट में खेल के आरोप, पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिला मौका!
जांच में सबसे अहम सवाल चयन के लिए तैयार की गई योग्यता सूची को लेकर उठा है। भर्ती नियमों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की अलग-अलग मेरिट सूची तैयार की जानी थी। प्रत्येक वर्ग में रिक्त पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को निर्धारित योग्यताक्रम के अनुसार साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था।
लेकिन आरोप है कि साक्षात्कार के लिए सूची बनाते समय शैक्षणिक अंकों के साथ अध्यापन अनुभव के बोनस अंक भी जोड़ दिए गए। इससे अभ्यर्थियों का योग्यताक्रम प्रभावित हुआ। जांच के मुताबिक, कुछ पात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल होने का अवसर नहीं मिला, जबकि निर्धारित योग्यताक्रम के अनुसार पात्र नहीं होने वाले कुछ अभ्यर्थियों को भी बुलाया गया।
आरक्षण और दिव्यांग अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल
भर्ती प्रक्रिया में महिला आरक्षण, दिव्यांग अभ्यर्थियों के चयन और विभिन्न वर्गों के समायोजन में भी नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप हैं।
जांच में अनुसूचित जाति के दिव्यांग वर्ग के चार पदों का उदाहरण सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों के मुताबिक, इन पदों के लिए 12 अभ्यर्थियों को बुलाया जाना था, लेकिन 15 अभ्यर्थियों में से केवल 10 को साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने की बात कही गई है।
चयन समिति में रिश्तेदार अभ्यर्थी, अंक देने पर भी उठे सवाल
मामले में चयन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्यों बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा के करीबी रिश्तेदारों के भी अभ्यर्थी होने की बात जांच में सामने आई है।
आरोप है कि संबंधित सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार के दौरान उपस्थित रहकर उन्हें अंक दिए। यह भी आरोप है कि साक्षात्कार से पहले रिश्तेदारों के अभ्यर्थी होने की जानकारी घोषित नहीं की गई थी।
यदि ये आरोप न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित होते हैं, तो चयन समिति की निष्पक्षता और हितों के टकराव को लेकर गंभीर सवाल खड़े होंगे। फिलहाल इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय को करना है।
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अध्यापन अनुभव के अंक देने का आरोप
जांच में कुछ अभ्यर्थियों के अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए गए हैं। ब्यूरो के मुताबिक, ऐसे दस्तावेज मिले जिनसे संबंधित अभ्यर्थियों के अनुभव दर्शाई गई अवधि में महाविद्यालयों में नियमित छात्र होने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की जानकारी सामने आई।
इसके बावजूद उन्हें अध्यापन अनुभव के अंक दिए जाने का आरोप है। जांच में इस पहलू को भी भर्ती प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं से जोड़कर देखा गया है।
इन अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ चालान
ब्यूरो ने मामले में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती और अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण एन.आर. वर्मा, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और तत्कालीन सदस्य हरिराम घृतलहरे सहित 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ चालान पेश किए जाने की जानकारी दी है।
मामले के अन्य आरोपी तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई और समिति के तत्कालीन सदस्य बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा की मृत्यु हो चुकी है।
भ्रष्टाचार और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में अभियोजन
ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य मिलने की बात कही है। करीब 1,000 पन्नों का चालान पेश होने के बाद अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
