जब RSS प्रमुख को ही करना पड़ा इंतजार! 45 मिनट लेट पहुंची अमरकंटक एक्सप्रेस…जानिए क्या है वजह

बिलासपुर 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की लेटलतीफी का असर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के सफर पर भी देखने को मिला। बिलासपुर प्रवास पूरा करने के बाद जबलपुर रवाना होने के लिए उन्हें उसलापुर रेलवे स्टेशन पर करीब 45 मिनट तक अमरकंटक एक्सप्रेस का इंतजार करना पड़ा। निर्धारित समय पर ट्रेन नहीं पहुंचने के कारण उन्हें स्टेशन पर रुकना पड़ा। बाद में ट्रेन पहुंचने पर वे जबलपुर के लिए रवाना हुए।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेनों की देरी यात्रियों के लिए लगातार परेशानी का विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही रेलवे के जोनल मुख्यालय में यात्रियों की समस्याएं सुनने के लिए जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था। ऐसे में ट्रेन की लेटलतीफी को लेकर रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
तय समय से पहले स्टेशन पहुंचे थे भागवत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोहन भागवत अपने दो दिवसीय बिलासपुर प्रवास के बाद शुक्रवार रात जबलपुर जाने वाले थे। इसके लिए उन्हें दुर्ग से चलकर उसलापुर पहुंचने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस से यात्रा करनी थी।
बताया गया है कि भागवत रात करीब 9 बजे ही उसलापुर स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन ट्रेन अपने निर्धारित समय पर नहीं पहुंची। अमरकंटक एक्सप्रेस करीब 9:45 बजे के बाद स्टेशन पहुंची। इस तरह उन्हें लगभग 45 मिनट इंतजार करना पड़ा।
ट्रेन आने के बाद वे सुरक्षा व्यवस्था के बीच जबलपुर के लिए रवाना हुए। हालांकि, इस देरी के पीछे रेलवे की ओर से कोई विशिष्ट कारण बताए जाने की जानकारी संबंधित रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।
दो दिन के प्रवास में संगठनात्मक बैठकों में हुए शामिल
मोहन भागवत 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर प्रवास पर थे। इस दौरान उन्होंने कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों से मुलाकात की।
प्रवास के पहले दिन उन्होंने बौद्धिक वर्ग को संबोधित किया। दूसरे दिन संघ के पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हुई। निर्धारित कार्यक्रम पूरा होने के बाद उन्हें जबलपुर के लिए रवाना होना था।
रिपोर्ट के अनुसार, शाम को कार्यक्रम पूरा होने के बाद उन्होंने कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ही भोजन किया और फिर ट्रेन पकड़ने के लिए उसलापुर स्टेशन पहुंचे।
एक दिन पहले रेलवे ने किया था जनसंवाद
ट्रेन की देरी का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि एक दिन पहले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल मुख्यालय में यात्रियों की समस्याएं सुनने के लिए जनसंवाद आयोजित किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम में यात्रियों को अपनी समस्याएं रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाने की बात सामने आई। रेलवे महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने स्टेशन का निरीक्षण किया और यात्रियों से बातचीत भी की।
हालांकि, ट्रेनों की लगातार देरी जैसी बड़ी समस्या पर जनसंवाद में प्रभावी चर्चा नहीं होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यात्रियों के लिए ट्रेन का समय पर नहीं पहुंचना केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि इससे आगे की यात्रा, कामकाज और दूसरी ट्रेनों से कनेक्शन भी प्रभावित हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की लेटलतीफी कब होगी दूर?
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों में देरी की शिकायतें यात्रियों की परेशानी बढ़ाती रही हैं। रेलवे प्रशासन की ओर से बुनियादी ढांचे के विकास और निर्माण कार्यों के कारण परिचालन प्रभावित होने की बात कही जाती रही है।
रेलवे नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण के काम लंबे समय में क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यात्रियों के लिए वर्तमान में समय पर ट्रेन मिलना भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे में सवाल यह है कि ट्रेनों की देरी कम करने के लिए रेलवे क्या कदम उठा रहा है? क्या यात्रियों को समय पर सही जानकारी मिल रही है? और क्या जनसंवाद जैसे कार्यक्रमों में सामने आने वाली समस्याओं के समाधान की समयसीमा तय की जा रही है?
मोहन भागवत को अमरकंटक एक्सप्रेस का इंतजार करना पड़ना इसी व्यापक समस्या की ओर ध्यान खींचता है। हालांकि, एक घटना से पूरे रेलवे नेटवर्क की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन यात्रियों की लगातार शिकायतों के बीच समयपालन और जवाबदेही पर चर्चा जरूरी है।
