RSS में आए हैं तो BJP का टिकट मत तलाशिए! मोहन भागवत का स्वयंसेवकों को दो-टूक संदेश, बिलासपुर में संगठन विस्तार पर मंथन

बिलासपुर/रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को राजनीतिक महत्वाकांक्षा से दूर रहकर समाजसेवा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ से जुड़ने का मतलब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में पद या चुनाव लड़ने के लिए टिकट पाने की उम्मीद करना नहीं है। स्वयंसेवक की असली पहचान उसके काम, व्यवहार, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण से बननी चाहिए।
दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे डॉ. भागवत ने सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान संघ के शताब्दी वर्ष की गतिविधियों, संगठन के विस्तार और स्वयंसेवकों की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया। उनके संदेश का केंद्र यह रहा कि संघ की ताकत केवल शाखाओं या सदस्यों की संख्या में नहीं, बल्कि समाज के बीच स्वयंसेवकों की विश्वसनीयता और सेवा भावना में है।
BJP में पद और टिकट की उम्मीद लेकर न आएं स्वयंसेवक
डॉ. भागवत ने संघ और भाजपा के कार्यक्षेत्रों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है, जो अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए काम करता है। वहीं, संघ का उद्देश्य समाज में संगठन, संस्कार और सेवा की भावना विकसित करना है।
संघ से जुड़े कई लोग भाजपा में सक्रिय हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संघ में आने का मकसद राजनीतिक अवसर हासिल करना हो। स्वयंसेवकों को अपनी पहचान किसी पद, राजनीतिक पहुंच या चुनावी लाभ के बजाय अपने काम से बनानी चाहिए।
उनके संदेश को संघ के भीतर सेवा और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देने की नसीहत के रूप में देखा जा रहा है। यानी स्वयंसेवक की प्रतिष्ठा इस बात से तय हो कि उसने समाज के लिए क्या किया, न कि इस बात से कि उसे राजनीति में कितना बड़ा पद मिला।
समाज में पहचान बनानी है तो व्यवहार से जीतें लोगों का भरोसा
सरसंघचालक ने स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सक्रिय रहने और लोगों से आत्मीय संबंध बनाने पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि संगठन का विस्तार केवल नए लोगों को जोड़ने से नहीं, बल्कि समाज में विश्वास कायम करने से होता है।
स्वयंसेवकों को लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने, जरूरतमंदों की सहायता करने और सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने की जरूरत है। उनका व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि लोग उनके काम से प्रभावित होकर स्वयं उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित हों।
भागवत के संदेश का साफ संकेत है कि संगठन की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए भाषणों और दावों से ज्यादा जरूरी जमीन पर काम करना है। समाज के बीच विश्वसनीयता ही स्वयंसेवक की सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में RSS का विस्तार, शाखाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर
बिलासपुर प्रवास के दौरान संघ के संगठनात्मक विस्तार और शताब्दी वर्ष में चल रही गतिविधियों की समीक्षा भी चर्चा का हिस्सा रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में पहले लगभग 3,800 शाखाएं थीं और अब करीब 2,400 अतिरिक्त स्थानों पर शाखाएं जुड़ने की बात कही गई है।
संघ की ओर से अधिक से अधिक स्थानों तक पहुंच बनाने और सामाजिक संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्वयंसेवकों की भूमिका, राष्ट्र निर्माण और समाज के प्रति दायित्वों पर भी चर्चा हुई।
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब संघ अपने शताब्दी वर्ष के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों को व्यापक बनाने और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की चर्चा
मोहन भागवत के दौरे के बीच छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश की मौजूदा प्रांतीय इकाई को दो हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों तक संगठन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
हालांकि, संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से ही होगी। फिलहाल, भागवत के प्रवास को संघ के विस्तार, युवा सहभागिता और भविष्य की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सौ साल के सफर में संघ का संदेश—सेवा पहले, स्वार्थ बाद में
RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान डॉ. मोहन भागवत का यह संदेश संगठन की कार्यशैली और स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों के लिए सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण को महत्वपूर्ण बताया।
राजनीतिक पद या चुनावी टिकट की अपेक्षा से दूर रहकर समाज के बीच अपनी पहचान बनाने की यह नसीहत संघ के कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश मानी जा रही है। बिलासपुर प्रवास के दौरान संगठन विस्तार के साथ सामाजिक विश्वास पर दिया गया जोर भी इसी सोच को सामने रखता है।
