छत्तीसगढ़ की पहली ‘राजकीय तितली’ बनी ऑरेंज ओकलीफ, पंख बंद करते ही बन जाती है सूखा पत्ता; जानिए इसकी अनोखी खासियत

रायपुर, 14 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को नई पहचान मिलने जा रही है। सूखे पत्ते जैसी दिखाई देने वाली ऑरेंज ओकलीफ तितली (Orange Oakleaf) प्रदेश की पहली राजकीय तितली बनने जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में इसके चयन को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही यह प्रजाति प्रदेश की प्राकृतिक विरासत और समृद्ध वन्यजीव विविधता का प्रतीक बनेगी।
राजकीय तितली के चयन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जनभागीदारी का रास्ता अपनाया था। इसके तहत 24 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन गूगल फॉर्म के जरिए नागरिकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों से सुझाव और वोट मांगे गए। चयन प्रक्रिया में कॉमन बैंडेड पीकॉक और स्पॉट स्वॉर्डटेल जैसी प्रजातियां भी शामिल थीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जनता के समर्थन और विशेषज्ञों की अनुशंसा के बाद ऑरेंज ओकलीफ को प्राथमिकता दी गई।
पंख बंद करते ही सूखे पत्ते में बदल जाती है!
ऑरेंज ओकलीफ की सबसे खास विशेषता उसका प्राकृतिक छद्मावरण है। इसे डेडलीफ और इंडियन ओकलीफ के नाम से भी जाना जाता है। जब यह अपने पंख बंद कर लेती है, तो इसका आकार, रंग और बनावट सूखे पत्ते जैसी दिखाई देती है। जंगल की जमीन पर गिरे पत्तों के बीच यह आसानी से नजरों से ओझल हो सकती है। यही प्राकृतिक विशेषता इसे पक्षियों और दूसरे शिकारियों से बचने में मदद करती है।
लेकिन पंख फैलाते ही इसका रूप पूरी तरह बदल जाता है। इसके पंखों के भीतरी हिस्से पर चमकीले नारंगी और गहरे नीले रंग दिखाई देते हैं। यही विरोधाभासी रंग और पत्ते जैसी बनावट इसे तितलियों की दुनिया की विशिष्ट प्रजातियों में शामिल करते हैं।
छत्तीसगढ़ में तितलियों की 201 प्रजातियां दर्ज
प्रदेश की जैव विविधता को लेकर किए गए अध्ययन में तितलियों की 19 ऐसी प्रजातियों का रिकॉर्ड सामने आया, जिनका पहले छत्तीसगढ़ में आधिकारिक दस्तावेजीकरण उपलब्ध नहीं था। इन नई प्रविष्टियों के साथ प्रदेश में दर्ज तितली प्रजातियों की संख्या 182 से बढ़कर 201 हो गई है।
यह आंकड़ा छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में मौजूद जैव विविधता की व्यापकता को दर्शाता है। तितलियां पर्यावरण और वन पारिस्थितिकी के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके आवास और संख्या में होने वाले बदलावों से प्राकृतिक परिस्थितियों के बारे में अहम संकेत मिल सकते हैं।
कांगेर घाटी में दिखती है तितलियों की विविधता
बस्तर का कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान तितलियों की विविधता के प्रमुख क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां ऑरेंज ओकलीफ, कॉमन जेम, ब्लू टाइगर और कॉमन मैप जैसी प्रजातियां देखे जाने की जानकारी दी गई है। इस क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति और अनुकूल आवास तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ऑरेंज ओकलीफ का भोजन भी इसे दूसरी तितलियों से अलग बनाता है। यह फूलों के रस के अलावा पके फलों के रस और पेड़ों से निकलने वाले द्रव पर भी निर्भर रहती है। इसके अलावा, यह गीली मिट्टी से खनिज लवण ग्रहण करती है। इस व्यवहार को वैज्ञानिक भाषा में ‘मड-पडलिंग’ कहा जाता है।
राजकीय तितली बनने से संरक्षण को मिलेगी नई पहचान
ऑरेंज ओकलीफ को छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली का दर्जा मिलने से प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को एक विशिष्ट पहचान मिलने की उम्मीद है। यह पहल लोगों को तितलियों, जंगलों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बन सकती है।
राजकीय प्रतीक के रूप में किसी विशिष्ट प्रजाति का चयन केवल उसकी सुंदरता को पहचान देना नहीं है, बल्कि उस जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता को सामने लाने का अवसर भी है, जो जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को जीवंत बनाए रखती है।
