अस्पताल में आरोपी को VIP ट्रीटमेंट? स्पेशल वार्ड में मोबाइल और गुटखा खाते मिला दुष्कर्म का आरोपी, पहरे पर तैनात पुलिसकर्मियों पर उठे सवाल

मामले में पवन महतो पर एक विधवा महिला को शादी का झांसा देकर लगातार दैहिक शोषण करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी अडानी पावर प्लांट में कार्यरत है। इस मामले में 8 अक्टूबर को FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ा था।
जानकारी के मुताबिक, मेडिकल लीगल प्रक्रिया (MLC) के दौरान तबीयत खराब होने की बात सामने आने पर आरोपी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन अस्पताल में उसकी निगरानी और उसे दी जा रही सुविधाओं को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
जनरल वार्ड की जगह स्पेशल वार्ड, मोबाइल इस्तेमाल पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, आरोपी को जनरल वार्ड के बजाय स्पेशल वार्ड में रखा गया है। आरोप है कि वहां वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था और गुटखा खाते हुए आराम से समय बिता रहा था। उसकी निगरानी के लिए दो आरक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब पुलिसकर्मियों की तैनाती आरोपी की निगरानी के लिए की गई थी, तो फिर अस्पताल में उसकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं दिखा? क्या ड्यूटी पर तैनात जवानों ने निर्धारित जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन किया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
CSP का तर्क—अभी तकनीकी रूप से गिरफ्तार नहीं था
मामले पर CSP प्रतीक चतुर्वेदी ने कहा कि आरोपी तकनीकी रूप से गिरफ्तार नहीं था। उसके भागने की आशंका को देखते हुए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। तबीयत खराब होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डिस्चार्ज होने के बाद उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
CSP ने यह भी कहा कि आरक्षकों की ओर से लापरवाही बरते जाने के मामले में SP स्तर पर जांच कराई जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
अब निगरानी व्यवस्था की होगी परीक्षा
इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल में पुलिस निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ महिला की शिकायत पर गंभीर आरोपों की जांच चल रही है, तो दूसरी तरफ आरोपी की अस्पताल में निगरानी को लेकर विवाद सामने आया है। अब देखना होगा कि जांच में ड्यूटी पर तैनात आरक्षकों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
