IAS मौर्य की बढ़ीं मुश्किलें: कोयले के बाद आयरन पैलेट पर भी कथित वसूली का आरोप, EOW चार्जशीट में IAS जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का जिक्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले की जांच में कथित अवैध वसूली का दायरा अब कोयला परिवहन से आगे बढ़कर लौह अयस्क और आयरन पैलेट परिवहन तक पहुंचने का दावा किया गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) के छठे पूरक अभियोग पत्र में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म IAS जयप्रकाश मौर्य की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।
EOW ने 5 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया। इसमें कुल 12 आरोपियों की भूमिका का उल्लेख है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कोयला परिवहन पर कथित तौर पर 25 प्रति टन और आयरन पैलेट परिवहन पर ₹100 प्रति टन की वसूली का तंत्र सामने आया है।
मौर्य से जुड़ी दो डायरी प्रविष्टियों में करीब ₹1 करोड़
चालान में EOW ने जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में करीब ₹1 करोड़ दर्ज होने का दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से कथित नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने और कथित वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने से जुड़े तथ्य मिले हैं।
EOW ने जब्त डायरियों के अलावा डिजिटल चैट, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, डायरी में किसी रकम की प्रविष्टि अपने आप में उस रकम के अवैध होने या किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जा सकती; इसका निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
कोयले के बाद पैलेट उद्योग तक पहुंची कथित वसूली
जांच एजेंसी के अनुसार, 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2022 के आदेश से सड़क और रेल मार्ग से परिवहन की व्यवस्था लागू की गई।
EOW का आरोप है कि इसी अवधि में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योग से जुड़े लोगों की बैठक लेकर उन्हें 100 प्रति टन सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए। जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त डायरियों में पैलेट उद्योग से कथित वसूली से जुड़ी प्रविष्टियां भी मिली हैं।
₹25 प्रति टन कोयला लेवी का भी उल्लेख
छठे पूरक चालान में EOW ने कोयला परिवहन से जुड़े कथित तंत्र का भी विवरण दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से ₹25 प्रति टन की दर से कथित अवैध वसूली की जाती थी और विभिन्न जिलों से रकम रायपुर पहुंचाए जाने के बाद उसका हिसाब और वितरण किया जाता था।
₹1,905 करोड़ और ₹2,025 करोड़ का गणित क्या है?
लौह अयस्क के 2018-2023 के कुल उत्पादन पर ₹100 प्रति टन और कोयले के उत्पादन पर ₹25 प्रति टन की दर लागू करने से क्रमशः 1,905 करोड़ और 2,025 करोड़ का गणितीय आंकड़ा निकल सकता है। लेकिन यह केवल उपलब्ध उत्पादन आंकड़ों पर आधारित सैद्धांतिक गणना है।
इस गणना का यह अर्थ नहीं है कि EOW ने पूरे उत्पादन पर इतनी रकम की वसूली साबित कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों में EOW द्वारा इस मामले में कथित अवैध कोल लेवी और अन्य वसूली का कुल आकलन 500 करोड़ से अधिक बताया गया है।
आदेश और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच
चालान में खनिज विभाग से जुड़े आदेशों और डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार, तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान के मोबाइल से आदेशों से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। EOW ने दस्तावेजों, डायरियों, डिजिटल चैट और बैंक लेन-देन को कथित वसूली व्यवस्था की कड़ियों से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई है।
रानू साहू के पति हैं जयप्रकाश मौर्य
जयप्रकाश मौर्य निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू के पति हैं। छठे पूरक चालान में EOW ने मौर्य की भूमिका को कोयला परिवहन से इतर आयरन पैलेट परिवहन से जुड़ी कथित वसूली और नकद लेन-देन के संदर्भ में भी रखा है।
अदालत तय करेगी आरोपों का अंतिम सच
EOW का छठा पूरक चालान जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपों का दस्तावेज है। इसमें दर्ज आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी बाकी है। इसलिए जयप्रकाश मौर्य समेत किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम अधिकार अदालत का है।
