20 साल से फर्जी पहचान पर Chhattisgarh में रह रहा था? बिलासपुर में अतीक हुसैन गिरफ्तार, आधार-पैन से पासपोर्ट तक जब्त

बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा है, जिसकी पहचान कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई है। आरोपी की पहचान अतीक हुसैन के रूप में बताई गई है। पुलिस जांच के मुताबिक, वह मूल रूप से बांग्लादेश के नारायणगंज का रहने वाला है और करीब दो दशक से भारत में रह रहा था।
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भारत में रहने के दौरान फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान हासिल की। उसके कब्जे से आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट समेत कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अब पुलिस इन दस्तावेजों की सत्यता के साथ-साथ इन्हें तैयार कराने में मदद करने वाले लोगों की भी जानकारी जुटा रही है।
2005 में इलाज के लिए आया था भारत, फिर नहीं लौटा
पुलिस के अनुसार अतीक हुसैन वर्ष 2005 में बांग्लादेश से भारत आया था। बताया जा रहा है कि वह घुटने के इलाज के लिए चेन्नई पहुंचा था। इलाज के बाद वह कथित तौर पर वापस बांग्लादेश नहीं गया और भारत में ही रहने लगा।
करीब 20 वर्षों के दौरान उसने किस पहचान के साथ भारत में निवास किया और भारतीय दस्तावेज कैसे हासिल किए, अब पुलिस इसी कड़ी को जोड़ने में जुटी है।
कार्रवाई की भनक लगी तो भाग निकला
जानकारी के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई की भनक लगने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर उसकी पहचान और मूल निवास को लेकर जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया।अब आरोपी से भारत में उसके प्रवेश, रहने के ठिकानों, संपर्कों और दस्तावेजों से जुड़े पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।
आधार-पैन से पासपोर्ट तक जांच के घेरे में
पुलिस ने अतीक हुसैन के कब्जे से आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच का अहम बिंदु यह है कि इन दस्तावेजों को उसने कैसे हासिल किया और इनके निर्माण अथवा सत्यापन की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस उसके बांग्लादेश स्थित पते की भी पुष्टि करने के साथ भारत में उसके संपर्कों और पिछले रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
बिलासपुर के डिटेंशन सेंटर में पहले से 4 संदिग्ध
अतीक हुसैन की गिरफ्तारी के बाद बिलासपुर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों की जांच का मुद्दा फिर चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर के डिटेंशन सेंटर में पहले से चार संदिग्ध व्यक्ति मौजूद हैं।
ऐसे में पुलिस की जांच अब सिर्फ अतीक हुसैन तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि उसके संपर्कों और कथित दस्तावेज नेटवर्क की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
अब खुलेगा दस्तावेजों का पूरा नेटवर्क?
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके पास मिले दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अतीक हुसैन ने भारत में करीब दो दशक तक किस पहचान के साथ निवास किया और कथित भारतीय दस्तावेज हासिल करने में उसकी मदद किसने की।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में केवल आरोपी की भूमिका थी या फिर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और पहचान बदलने के पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी सक्रिय था।
