राखी से पहले ‘विष्णु भैया’ का बड़ा तोहफा! महतारी वंदन की 31वीं किस्त से बहनों के चेहरे खिले
रानी, प्रमिला और करिश्मा के लिए खाते में आई ₹1000 की राशि बनी राखी का शगुन; बोलीं—राखी-मिठाई से लेकर घर की जरूरतों में मिल रहा आर्थिक संबल

रायपुर, 25 अगस्त 2026। रक्षाबंधन से पहले छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए इस बार त्योहार की खुशी कुछ और खास हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की है। खाते में पहुंची एक हजार रुपये की राशि कई महिलाओं के लिए राखी के पहले मिले शगुन जैसी बन गई है।
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आत्मीय रिश्ते का पर्व है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी खुशियों की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेते हैं। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले महतारी वंदन की राशि मिलने से महिलाओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सरकार की ओर से इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा जा रहा है।
बलरामपुर की रानी एक्का, प्रमिला विश्वकर्मा और करिश्मा देवी की कहानी इस बदलाव की छोटी-सी तस्वीर पेश करती है। किसी के लिए यह राशि भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी का जरिया बनी है, तो किसी के लिए घर की जरूरी चीजों में सहयोग का आधार।
रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची राशि, रानी बोलीं- लगा जैसे भाई ने भेजा शगुन
बलरामपुर के वार्ड क्रमांक-01 की निवासी श्रीमती रानी एक्का के लिए महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली खुशी लेकर आई। खाते में एक हजार रुपये पहुंचने पर उन्होंने इसे त्योहार के समय मिला महत्वपूर्ण सहयोग बताया।
रानी के मुताबिक रक्षाबंधन आने वाला है और ऐसे समय में खाते में राशि आना उनके लिए खुशी की बात है। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की बहनों को राखी का उपहार पहले ही भेज दिया है।
उनका कहना है कि महतारी वंदन की राशि केवल त्योहार के खर्च तक सीमित नहीं है। इससे घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलती है। अपने खर्च को लेकर थोड़ा स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
प्रमिला के लिए भाई की राखी और मिठाई का इंतजाम
विकासखंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत भनौरा की प्रमिला विश्वकर्मा के लिए भी महतारी वंदन की 31वीं किस्त रक्षाबंधन का खास शगुन बनकर आई है।
प्रमिला को योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि मिलती है। उनके अनुसार अब तक उन्हें 30 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। रक्षाबंधन से ठीक पहले नई किस्त मिलने से उनके चेहरे पर खुशी है।
प्रमिला बताती हैं कि वह इस राशि से अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री को आत्मीयता से ‘विष्णु भैया’ कहने वाली प्रमिला का कहना है कि रक्षाबंधन के मौके पर बहनों के खातों में राशि पहुंचना उनके लिए खास अनुभव है।
उनके लिए यह सिर्फ एक सरकारी भुगतान नहीं, बल्कि त्योहार के समय मिली ऐसी मदद है, जिससे वे अपनी जरूरत खुद पूरी कर सकती हैं।
करिश्मा को अब राखी के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं
ग्राम डुमरखी की करिश्मा देवी के लिए महतारी वंदन की राशि त्योहार की तैयारियों में आर्थिक सहारा लेकर आई है।
करिश्मा का कहना है कि खाते में राशि आने के बाद अब उन्हें अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। वह इस बार अपने स्तर पर रक्षाबंधन की तैयारी कर रही हैं। करिश्मा के शब्दों में, “विष्णु भैया का यही अरमान है कि हर बहन के चेहरे पर मुस्कान रहे।”
₹1000 की राशि, लेकिन महिलाओं के लिए मायने बड़ा
महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली राशि की रकम भले ही एक हजार रुपये है, लेकिन सरकार इसे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देख रही है।
महिलाओं के मुताबिक नियमित राशि मिलने से वे घर की छोटी जरूरतों, बच्चों से जुड़े खर्च, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और त्योहारों की तैयारी में इसका इस्तेमाल कर पा रही हैं। कई महिलाएं अपनी राशि को बचत या दूसरी आर्थिक गतिविधियों में भी उपयोग करने की बात कहती हैं।
योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचती है। इससे उन्हें अपने पैसे के उपयोग को लेकर निर्णय लेने का अवसर मिलता है।
राखी के त्योहार से जुड़ा भावनात्मक संदेश
महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त का रक्षाबंधन से पहले पहुंचना राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इसे महिलाओं के प्रति अपने सम्मान, भरोसे और आर्थिक संबल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहन को उपहार देता है। इसी भाव को सरकार ने ‘विष्णु भैया’ के संबोधन से जोड़ते हुए महिलाओं तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
बलरामपुर की रानी, प्रमिला और करिश्मा के अनुभवों में भी यही भाव दिखाई देता है। उनके लिए खाते में पहुंची राशि त्योहार की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ अपने फैसले खुद लेने के आत्मविश्वास का माध्यम भी बन रही है।
हर महीने की राशि से बढ़ रहा आर्थिक आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना को केवल मासिक आर्थिक सहायता की योजना के तौर पर नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। नियमित राशि मिलने से महिलाओं को अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।
छोटी राशि से शुरू होने वाला यही आर्थिक आत्मविश्वास आगे चलकर बचत, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों और दूसरी आर्थिक गतिविधियों में उपयोगी साबित हो सकता है। रक्षाबंधन के मौके पर योजना की किस्त ने इस भाव को और मजबूत किया है।
राखी की कलाई पर धागा, खाते में सरकार का संबल
इस बार जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी, तब उनके लिए त्योहार की तैयारियों में महतारी वंदन की राशि भी एक सहारा होगी। किसी के घर में मिठाई आएगी, कोई राखी खरीदेगा तो कोई इस रकम को अपनी दूसरी जरूरत में इस्तेमाल करेगा।
रानी, प्रमिला और करिश्मा की कहानी सिर्फ तीन महिलाओं की कहानी नहीं है। यह उन लाखों महिलाओं की तस्वीर है, जिनके लिए नियमित आर्थिक सहायता छोटी-छोटी जरूरतों के बीच बड़ा सहारा बन रही है।
रक्षाबंधन के इस पर्व पर सरकार का संदेश भी साफ है—बहनों की खुशियां, उनका सम्मान और उनका आर्थिक आत्मविश्वास सरकार की प्राथमिकताओं में है।
राखी के धागे में भाई-बहन का विश्वास और खाते में महतारी वंदन का संबल—इसी भरोसे के साथ इस बार छत्तीसगढ़ की बहनें रक्षाबंधन मनाने जा रही हैं।
