यूथ कांग्रेस चुनाव से पहले कांग्रेस में फूटा ‘गुटबाजी बम’! राजीव भवन में भिड़े दो धड़े, BJP कनेक्शन के आरोप से गरमाया माहौल

अंबिकापुर, 20 अगस्त 2026। यूथ कांग्रेस चुनाव से पहले ही कांग्रेस की अंदरूनी सियासत गरमा गई है। अंबिकापुर के राजीव भवन में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशी के नाम को लेकर कांग्रेस के दो गुट आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप के बीच विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी कार्यालय में काफी देर तक तीखी बहस और गहमागहमी का माहौल बना रहा।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए रवि शंकर नायक की उम्मीदवारी सामने आने के बाद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रवि शंकर नायक को भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में पदाधिकारी बनाया गया था।
इसी आरोप को लेकर चुनाव प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला पार्टी कार्यालय के भीतर खुली खींचतान में बदल गया।
रवि शंकर नायक का पलटवार- ‘मैं कभी BJP में शामिल नहीं हुआ’
विवाद के बीच रवि शंकर नायक ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि वह कभी भाजपा में शामिल नहीं हुए और कुछ लोग गलतफहमी के कारण उनका नाम भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा से जोड़कर प्रचारित कर रहे हैं।
उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठाने की कोशिश की जा रही है।
राजीव भवन में बढ़ा तनाव, वरिष्ठ नेताओं को करना पड़ा हस्तक्षेप
उम्मीदवारी को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही तीखी बहस में बदल गया। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक नोकझोंक होती रही। हालात बिगड़ते देख कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक समेत वरिष्ठ नेताओं को मौके पर पहुंचना पड़ा।
वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराया। हालांकि, विवाद ने पार्टी के भीतर चल रही गुटीय खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
चुनाव से पहले ही कांग्रेस में ‘कौन किसके साथ?’ की लड़ाई
यूथ कांग्रेस का चुनाव अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और अंबिकापुर कांग्रेस में दावेदारी, गुट और राजनीतिक पहचान को लेकर टकराव सामने आ गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रवि शंकर नायक की उम्मीदवारी पर उठे आरोपों का पार्टी नेतृत्व क्या जवाब देता है और चुनाव प्रक्रिया आगे किस तरह बढ़ती है। फिलहाल राजीव भवन का विवाद अंबिकापुर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।
