स्मार्ट मीटर पर कांग्रेस फैला रही भ्रम, इसकी शुरुआत कांग्रेस सरकार में ही हुई थी : क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी
रायपुर, 21 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस के विरोध और सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर पलटवार करते हुए क्रेडा के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी, सुविधाजनक और जागरूक व्यवस्था उपलब्ध कराने का माध्यम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए जनता के बीच भ्रम फैला रही है, जबकि इस परियोजना की शुरुआत और टेंडर प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही पूरी की गई थी।
सवन्नी ने बताया कि भारत सरकार ने 20 जुलाई 2021 को रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर योजना शुरू की थी और 29 जुलाई 2021 को इसकी संचालन संबंधी गाइडलाइन जारी की गई। छत्तीसगढ़ में परियोजना की डीपीआर 13 जुलाई 2022 को मंजूर हुई, जबकि 22 सितंबर 2022 को टेंडर जारी किए गए। जून 2023 में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायगढ़ और रायपुर के लिए तथा अक्टूबर 2023 में दुर्ग, राजनांदगांव और जगदलपुर क्षेत्रों के लिए एजेंसियों का चयन कांग्रेस सरकार के दौरान ही किया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज जिस स्मार्ट मीटर योजना का विरोध कर रही है, उसी योजना को उसके शासनकाल में आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और यूपीए शासित राज्यों जैसे केरल, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जबकि कर्नाटक में भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
बिजली बिल बढ़ने का कारण स्मार्ट मीटर नहीं
सवन्नी ने कहा कि अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी के दौरान एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली खपत बढ़ जाती है। अधिक खपत होने पर उपभोक्ता ऊंचे टैरिफ स्लैब में पहुंच जाते हैं, जिससे बिजली बिल बढ़ता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत अभियान के तहत 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक आधे बिल की छूट मिलती है। यदि किसी माह में खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो यह छूट स्वतः समाप्त हो जाती है, जिससे बिल अधिक दिखाई देता है।
इसके अलावा, यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन महीने तक स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड का उपयोग करता है तो नियमानुसार केवल एक बार 800 रुपये प्रति किलोवाट की दर से अतिरिक्त शुल्क लेकर स्वीकृत लोड बढ़ाया जाता है।
रीडिंग पर संदेह हो तो उपलब्ध है जांच की सुविधा
क्रेडा अध्यक्ष ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं को मीटर की रीडिंग पर संदेह है, उनके लिए चेक मीटर लगाने की व्यवस्था उपलब्ध है। अब तक की जांच में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर की रीडिंग में कोई अंतर नहीं पाया गया है।
उन्होंने उपभोक्ताओं से ‘मोर बिजली’ ऐप का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इस ऐप के माध्यम से हर 30 मिनट में बिजली खपत की जानकारी देखी जा सकती है। इससे उपभोक्ता अपनी खपत नियंत्रित कर 400 यूनिट की सीमा के भीतर रहकर हाफ बिजली योजना का लाभ उठा सकते हैं। किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।
रूफटॉप सोलर को बताया स्थायी समाधान
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का उल्लेख करते हुए सवन्नी ने कहा कि बिजली बिल कम करने का सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय रूफटॉप सोलर है। योजना के तहत 1 किलोवाट पर 45 हजार रुपये, 2 किलोवाट पर 90 हजार रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर केंद्र और राज्य सरकार मिलाकर 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1.87 लाख से अधिक उपभोक्ता प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के लिए आवेदन कर चुके हैं और 80 हजार से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इससे हजारों परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है।
सवन्नी ने कहा कि स्मार्ट मीटर और सोलर ऊर्जा जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपभोक्ताओं को सुविधा, पारदर्शिता और आर्थिक लाभ देने के लिए लागू की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर नहीं, बल्कि तथ्य आधारित जानकारी पर भरोसा करें।

