‘मलाईदार पोस्टिंग’ पर चला प्रशासन का डंडा, शिक्षक-कर्मचारियों का संलग्नीकरण खत्म, आदेश से मचा हड़कंप
Teacher Transfer: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ जिला बीजापुर के शिक्षा विभाग में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कलेक्टर ने एक झटके में सालों से मलाईदार कुर्सियों और मखमली दफ्तरों का सुख भोग रहे 74 अधिकारियों, शिक्षकों, लिपिकों और भृत्यों का संलग्नीकरण (अटैचमेंट) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया। कलेक्टर द्वारा जारी इस कड़े आदेश के बाद जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) से लेकर तमाम प्रशासनिक गलियारों में दिनभर कानाफूसी और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
15 सालों का ‘आराम’ खत्म, अब जाना होगा ब्लैकबोर्ड के पास
दरसअल, राज्य शासन के सख्त निर्देश हैं कि गैर-शैक्षणिक कार्यालयों में जमे शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजा जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। बीजापुर में खेल इसके उलट चल रहा था। कई रसूखदार शिक्षक और कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से जिला शिक्षा कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय, BRC, संकुल, तहसील, जनपद पंचायत, आदिवासी विकास विभाग, निर्वाचन शाखा और यहां तक कि विधायक कार्यालय तक में अटैच होकर बाबूगीरी कर रहे थे।
कलेक्टर के इस आदेश के बाद अब इन सभी साहब बन चुके गुरुजियों को वापस अपने मूल विद्यालयों और संस्थाओं में जाकर चॉक-डस्टर थामना होगा और बच्चों को पढ़ाना होगा।
DEO दफ्तर के ये 5 ‘रसूखदार’ भी हटाए गए
प्रशासन की इस कार्रवाई की जद में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भी 5 बड़े नाम शामिल हैं, जो लंबे समय से यहीं जमे हुए थे। आदेश के तहत: बी.एल. पुजारी को वापस तुमनार स्कूल भेजा गया। जाकिर खान को नैमेड़ स्कूल भेजा गया। दुर्गम सुब्बैया को धनोरा स्कूल भेजा गया। मनोज कवटी को ईटपाल स्कूल भेजा गया। नरदेव सिंह को ताड़मेंट्री स्कूल में तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
कड़ा रुख: DEO बोले- तत्काल जॉइन करें, कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी
इस पूरी कार्रवाई को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पाण्डेय ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य शासन के स्पष्ट और कड़े निर्देशों के अनुरूप ही जिले में यह बड़ी कार्रवाई की गई है। सभी 74 संबंधित अधिकारियों, शिक्षकों, लिपिकों और भृत्यों को बिना किसी देरी के अपनी मूल पदस्थापना वाली संस्था में जाकर तत्काल ड्यूटी जॉइन करनी होगी। आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था
सूत्रों की मानें तो बीजापुर के दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूल लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे थे, जिससे गरीब आदिवासियों के बच्चों का भविष्य अंधकार में था। वहीं दूसरी ओर, ये शिक्षक जिला मुख्यालय और शहरों के दफ्तरों में वीआईपी ड्यूटी कर रहे थे। प्रशासन के इस कड़े कदम से अब अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी।



