सुशासन तिहार में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन; बेलतरा की बदहाली गिनाकर सरकार को घेरा, सौंपा 15 सूत्रीय मांगपत्र

– जिस मंच से सरकार सुशासन का दावा कर रही थी, वहीं पानी, खाद, बिजली और सड़क को लेकर विपक्ष ने खोला मोर्चा
बिलासपुर/नगोई। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक चलाए जा रहे “सुशासन तिहार 2026” का उद्देश्य जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण और प्रशासन को आमजन के करीब लाना बताया गया है। सरकार का दावा है कि शिविरों में लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया गया है।
लेकिन बेलतरा विधानसभा के ग्राम नगोई में आयोजित जिला स्तरीय सुशासन तिहार कार्यक्रम में तस्वीर कुछ अलग नजर आई। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस ने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया और जिला प्रशासन को 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए।

पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण कार्यक्रम स्थल पहुंचे। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार भले ही सुशासन का दावा कर रही हो, लेकिन बेलतरा क्षेत्र के कई गांव आज भी पेयजल संकट, बिजली कटौती, खराब सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा पेयजल संकट का रहा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जल योजनाएं कई जगह ठप पड़ी हैं। गांवों में पानी की टंकियां खड़ी हैं, लेकिन नलों तक पानी नहीं पहुंच रहा। महिलाओं को आज भी दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है।

किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरीफ सीजन की तैयारी के बीच किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं। कई समितियों में पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से किसानों को भटकना पड़ रहा है। साथ ही बिजली की आंख-मिचौली और लो-वोल्टेज की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही।
ज्ञापन में खूँटाघाट नहर मार्ग के पुनर्निर्माण, पंचायतों को पर्याप्त विकास निधि, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की नियुक्ति, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा, युवाओं के लिए रोजगार, अवैध उत्खनन पर रोक और केंद्रीय जेल परियोजना से प्रभावित किसानों के हितों की रक्षा जैसी मांगें शामिल की गईं।
इस दौरान विजय केशरवानी ने कहा कि जनता किसी पर एहसान नहीं मांग रही, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि गांवों में पानी, किसानों को खाद, युवाओं को रोजगार और लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो सुशासन के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।
सुशासन तिहार के मंच पर कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल स्थानीय समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बेलतरा विधानसभा में विपक्ष की बढ़ती सक्रियता का संकेत भी माना जा रहा है। जिस कार्यक्रम को सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रदर्शन के रूप में देख रही थी, वहीं विपक्ष ने उसे जनाक्रोश के मंच में बदलने की कोशिश की। ऐसे में आने वाले समय में बेलतरा की राजनीति में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है।











