पूर्व IPS अफसर संजीव भट्ट को झटका, NDPS केस में सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी संजीव भट्ट द्वारा गुजरात से राजस्थान में उनके खिलाफ लंबित ड्रग्स से संबंधित एक मामले को ट्रांसफर करने के लिए दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।  राजस्थान हाई कोर्ट ने 26 अगस्त, 2020 को इस याचिका पर विचार करने के बाद खारिज कर दिया था। भट्ट ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। भट्ट के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में तर्क दिया कि हाई कोर्ट कथित रूप से यह नोटिस करने में विफल रहा कि एक ही मामले में दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। एक गुजरात के पालनपुर सिटी पुलिस स्टेशन में और दूसरा राजस्थान के पाली में कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की धारा-186 के तहत राहत मांगी गई थी, जो अपराध होने पर एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की अनुमति देता है। अपने विस्तृत फैसले में हाई कोर्ट ने माना है कि गुजरात के पालनपुर और राजस्थान के पाली में दर्ज कराए गए दो अपराध अलग-अलग थे। हाई कोर्ट ने आगे कहा था कि पहली शिकायत गुजरात के पालनपुर और उसके बाद पाली में दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस अशोक भूषण, आरएस रेड्डी और एमआर शाह ने कहा, ”हाई कोर्ट का फैसला काफी विस्तृत है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। ये याचिकाएं खारिज की जाती हैं।”

एक मामले में एक सुमेर सिंह राजपुरोहित की गिरफ्तारी के बाद भट्ट के खिलाफ मामला सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, पालनपुर के होटल लाजवंती में लाई जा रही दवाओं के बारे में जानकारी मिली थी। छापेमारी की कार्रवाई के दौरान ड्रग्स को बरामद किया गया और नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत राजपुरोहित को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में, विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने फरवरी 2000 में एक समरी रिपोर्ट दायर की थी।

वहीं, पाली का मामला गुजरात मामले में आरोपी सुमेर सिंह राजपुरोहित द्वारा दायर एक आपराधिक शिकायत के परिणामस्वरूप हुआ, जिसने 17 अक्टूबर, 1996 को एक बयान दिया, जिसमें भट्ट सहित नौ लोगों पर ड्रग्स को लेकर आरोप लगाए गए थे। जांच के बाद चार्जशीट मार्च 1997 में जोधपुर की विशेष अदालत के सामने चार्जशीट दायर की गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि ट्रायल तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक कि उन्हें 23 बचाव गवाहों की जांच करने की अनुमति नहीं दी जाती है। मई 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था, जिसपर भट्ट ने रिव्यू पिटिशन दायर की थी, जोकि अभी तक लंबित थी। 

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