Teeja Pora Tihar : विष्णु भैया संग तीजा-पोरा महतारी वंदन तिहार, मुख्यमंत्री निवास सज-धज कर तैयार


Teeja Pora Tihar :  विष्णु भैया संग तीजा-पोरा महतारी वंदन तिहार के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का रायपुर निवास सज-धज कर तैयार है। मुख्यमंत्री निवास में दो सितम्बर को पूर्वान्ह 11 बजे से 1 बजे तक तीजा-पोरा महतारी वंदन तिहार का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम अपने निवास पर तिहार की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अतिथियों की बैठक व्यवस्था, पूजा स्थल, मंच आदि व्यवस्थाएं देखीं। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद और बसवराजु एस. भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री निवास की छत्तीसगढ़ की परम्परा और रीति-रिवाज के अनुसार साज-सज्जा की गई हैं। रंग-बिरंगे वंदनवारों, फूलों से आयोजन स्थल को सजाया गया है। मिट्टी के खूबसूरत नंदिया बइला और रंगीन खिलौनों से पूजा स्थल को सजाया गया है। यहां भगवान शिव और नंदिया बैला की आकर्षक प्रतिमा बनाई गई है।

Teeja Pora Tihar : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 2 सितम्बर को अपने निवास परिसर में पूर्वान्ह 11 बजे तीजा-पोरा तिहार के कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री साय अपरान्ह 2.35 बजे पुलिस ग्राउण्ड हेलीपेड से रवाना होकर 2.55 बजे दुर्ग जिले के धमधा तहसील स्थित ग्राम मडियापार पहुंचेंगे और वहां पोला महोत्सव-2024 में शामिल होने के बाद शाम 4.30 बजे रायपुर लौट आएंगे।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों विशेष रूप से किसान भाईयों को पोला तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की है। पोला तिहार की पूर्व संध्या पर जारी अपने शुभकामना संदेश में श्री साय ने कहा है कि पोला तिहार किसानों का खेती किसानी से जुड़ा सबसे बड़ा त्योहार है। यह हमारे जीवन में खेती-किसानी और पशुधन का महत्व बताता है। इस दिन घरों में उत्साह से बैलों और जाता-पोरा की पूजा कर अच्छी फसल और घर को धन-धान्य से परिपूर्ण होनेे के लिए प्रार्थना की जाती है। यह छत्तीसगढ़ की परम्परा, संस्कृति और लोक जीवन की गहराइयों से जुड़ा पर्व है।

सीएम साय ने कहा कि तीज-त्यौहार हमारी संस्कृति और परम्पराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। पोला के दिन मिट्टी के बर्तन और बैलों से खेलकर बच्चे अनजाने ही अपनी मिट्टी और उसके संस्कारों से जुड़ जाते हैं। श्री साय ने कहा कि अगली पीढ़ियों तक अपनी समृद्ध संस्कृति को पहुंचाने और उन्हें जमीन से जोड़े रखने के लिए पारंपरिक त्योहारों का संरक्षण और संवर्धन अवश्यक है।

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