जांजगीर में कोल डिपो पर बड़ी कार्रवाई, मां शारदा लॉजिस्टिक्स की अनुज्ञप्ति रद्द; नियमों की अनदेखी पर कलेक्टर ने की कार्रवाई
तय सीमा से बाहर मिला भंडारण; मां शारदा लॉजिस्टिक्स की अनुज्ञप्ति रद्द 1.503 हेक्टेयर की अनुमति, 1.948 हेक्टेयर में चल रहा था कोल डिपो;

जांजगीर। जांजगीर जिला प्रशासन ने ग्राम कन्हाईबंद स्थित मैसर्स मां शारदा लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के चलते प्रशासन ने कंपनी को जारी खनिज कोयले के अस्थायी भंडारण की अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी है। जांच में सामने आया कि कंपनी स्वीकृत क्षेत्र से अधिक जमीन पर कोल डिपो का संचालन कर रही थी।
प्रशासन के अनुसार, कंपनी को 1.503 हेक्टेयर क्षेत्र में एक समय में अधिकतम 80 हजार मीट्रिक टन कोयले के अस्थायी भंडारण की अनुमति दी गई थी। हालांकि, जांच में कोल डिपो का संचालन 1.948 हेक्टेयर यानी करीब 4.80 एकड़ क्षेत्र में किया जाना पाया गया।
इन अनियमितताओं का हुआ खुलासा
नियमों के उल्लंघन की शिकायत के बाद कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जांच के निर्देश दिए थे। खनि निरीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जांजगीर और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की रिपोर्ट के आधार पर कई गंभीर कमियां सामने आईं।
जांच में पाया गया कि— स्वीकृत क्षेत्र की तार फेंसिंग अथवा ईंट की दीवार से घेराबंदी नहीं की गई थी। कोल डिपो में पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं कराया गया था। प्रदूषित पानी को बिना उपचार के नाले में बहाया जा रहा था। प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था नहीं थी। अग्निशमन यंत्र और मजदूरों के लिए जरूरी सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं थे। कोयले के आवक-जावक और स्टॉक से संबंधित आवश्यक रजिस्टर संधारित नहीं किए गए थे। निर्धारित मासिक विवरणी भी प्रस्तुत नहीं की जा रही थी। स्वीकृत क्षेत्र से अधिक जमीन पर कोल डिपो संचालित किया जा रहा था।
इन गतिविधियों को छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है।
बिना विकास अनुज्ञा के निर्माण का भी आरोप
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम कन्हाईबंद के कई खसरा नंबर जांजगीर विकास योजना क्षेत्र में शामिल हैं। संबंधित भूमि पर विकास अनुज्ञा के लिए आवेदन किए बिना निर्माण कर व्यावसायिक कोल भंडारण का काम संचालित किया जा रहा था। इस मामले में संबंधित विभाग ने भूमि विकास, अवैध निर्माण हटाने अथवा भूमि को पूर्व स्थिति में लाने के संबंध में नोटिस जारी किया है।
रेलवे अंडरब्रिज को लेकर भी आपत्ति
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर से प्राप्त रिपोर्ट में भी कोल डिपो से संबंधित दस्तावेजों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। रेलवे के अनुसार, कोल डिपो संचालन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में रेलवे अंडरब्रिज को उचित रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया था। साथ ही गलत अथवा अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने का मामला भी सामने आया।
15 दिन का नोटिस, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर लाइसेंस रद्द
जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कंपनी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा था। कंपनी की ओर से प्रस्तुत जवाब को संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी।
कंपनी को ग्राम कन्हाईबंद स्थित खसरा नंबर 645/5, 645/8, 645/30, 645/36, 645/6, 645/17, 645/3, 645/4, 645/21 और 645/25 की कुल 1.503 हेक्टेयर भूमि पर 80 हजार मीट्रिक टन कोयले के अस्थायी भंडारण की अनुमति दी गई थी। यह अनुज्ञप्ति 26 फरवरी 2020 से 25 फरवरी 2030 तक प्रभावी थी। अब छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 के नियम 15 के तहत उक्त अनुज्ञप्ति को निरस्त कर दिया गया है।
