CGPSC Scam: पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से झटका, जमानत खारिज; कोर्ट बोला- पेपर लीक हत्या से भी जघन्य अपराध

बिलासपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के चर्चित प्रश्नपत्र लीक एवं भर्ती घोटाले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव (62) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को बेहद गंभीर माना और कड़ी टिप्पणी की कि प्रतियोगी परीक्षाओं का प्रश्नपत्र लीक करना हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है, क्योंकि इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरू की एकलपीठ में हुई। अदालत ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं। आदेश में अदालत ने टिप्पणी की कि “बाड़ ही खेत को खाने लगे” जैसी स्थिति ऐसे मामलों में दिखाई देती है, जहां गोपनीयता की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही उस भरोसे को तोड़ देते हैं।
बेटे को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप
सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान जब CGPSC की राज्य सेवा परीक्षा आयोजित हुई, तब जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने पद की गोपनीय जिम्मेदारी का उल्लंघन करते हुए मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराए।
छापे में मिले प्रश्नपत्र और उत्तर
सीबीआई की ओर से भिलाई स्थित आवास पर की गई तलाशी के दौरान पेपर-7 (सामान्य अध्ययन) के उत्तर तथा पेपर-2 (निबंध) की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका (Question-cum-Answer Booklet) की प्रतियां बरामद हुईं। जांच में पाया गया कि मुख्य परीक्षा के पेपर-7 के 47 में से 42 प्रश्न वही थे, जो आरोपी के घर से जब्त दस्तावेजों में मौजूद थे।
डिप्टी कलेक्टर बना बेटा
जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक का लाभ मिलने के बाद जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ। हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने पहले ही आयोग को अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दे दी थी और वे गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग कर चुके थे।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जीवन किशोर ध्रुव सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, 18 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं और सह-आरोपियों को मिली राहत के आधार पर उन्हें भी जमानत दी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि एक वरिष्ठ लोकसेवक की जिम्मेदारी सामान्य व्यक्ति से कहीं अधिक होती है। सीबीआई द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, गवाहों के बयान और आरोपी के घर से हुई बरामदगी प्रथम दृष्टया साजिश में उनकी सीधी भूमिका की ओर संकेत करती है।
अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता और जनता के विश्वास पर इस तरह के अपराध का गंभीर असर पड़ता है। ऐसे मामलों में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
